कटनी। आम जनता के मेहनत की गढ़ी कमाई का बंदरबांट करने के लिए हमेशा सुर्खियों में रहने वाली कटनी नगर निगम के जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदारों का एक नया घोटाला इन दिनों खास चर्चा में है। इस बार जनता के टैक्स रूपी खजाने को खाली करने के लिए आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती और उन्हें भुगतान का जाल बुना गया है। नगर निगम के जनप्रतिनिधियों और कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की मिली भगत से यह भ्रष्टाचार करने का पूरा जाल बुना गया है। वर्तमान में लगभग साढे 500 आउटसोर्स कर्मचारी कटनी नगर निगम में तैनात हैं, जिन्हें जनता के द्वारा जमा किए गए टैक्स से प्रति माह वेतन प्रदान किया जाता है। चर्चा यह सामने आ रही है कि आउटसोर्स भर्ती घोटाला के जरिए कई ऐसे नाम आउटसोर्स कर्मचारी के रूप में शामिल हैं, जो की काम तो नहीं करते लेकिन उनके नाम पर पैसा पूरा निकलता है। अब जब जनता के द्वारा जमा किए गए टैक्स से आउटसोर्स कर्मचारी के नाम पर पैसा निकलता है तो फिर आखिर किसकी जेब में जाता होगा इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं। यही वजह है कि इन सभी चर्चाओं के बीच बीते दिनों नगर निगम कमिश्नर तपस्या परिहर ने इस पूरे घोटाले के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए लगभग आधा सैकड़ा से भी अधिक ऐसे फर्जी आउटसोर्स कर्मचारियों की आईडी लॉक कर दी। इसके बाद नगर निगम के जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों की नींद उड़ गई। आखिर नींद उड़े भी तो क्यों न, हर महीने होने वाली एक मोटी आमदनी के जरिए पर जो इस तरह कमिश्नर ने प्रहार कर दिया।
कई और भी मौजूद
बताया जाता है कि वर्तमान में कटनी नगर निगम में लगभग साढे 500 आउटसोर्स महिला पुरुष कर्मचारी कार्यरत हैं। जिनमें से डेढ़ से दो सैकड़ा कर्मचारी ऐसे हैं, जो कि काम नहीं करते, लेकिन उनके नाम पर हाजिरी लगाकर पूरा वेतन निकाला जाता है। आपको यहां पर यह भी बता दे की आउटसोर्स कर्मचारी दो प्रकार के होते हैं एक तो कुशल जिन्हें नगर निगम में विभिन्न पदों पर नियुक्त कर उनकी सेवाएं ली जाती है, दूसरा है अकुशल जिन्हें कलेक्टर रेट पर प्रतिमाह वेतन प्रदान किया जाता है। इन कर्मचारियों को जरूरत के हिसाब से विभिन्न विभागों में तैनात किया जाता है।
पहले भी उठा था मुद्दा
नगर निगम में आउटसोर्स कर्मचारियों के नाम पर होने वाले बड़े घोटाले को लेकर पूर्व नगर निगम के प्रभारी कमिश्नर (आईएएस) शिशिर गेमावत के द्वारा सख्त कदम उठाए गए थे। जिसके बाद नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर संकट के बादल मंडराने लगे रहे थे। लेकिन जल्द ही नगर निगम कटनी में कमिश्नर नीलेश दुबे की पदस्थापना हो जाने के कारण पूर्व प्रभारी (आईएएस) अधिकारी श्री गेमावत के द्वारा शुरू की गई जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
बढ़ी उम्मीदें
पूर्व आईएएस अधिकारी शिशिर गेमावत के द्वारा शुरू कराई गई जांच भले ही ठंडे बस्ते में चली गई हो, लेकिन अब वर्तमान कमिश्नर (आईएएस) तपस्या परिहर के सख्त रवैए ने एक बार फिर ठंडी पड़ी उस जांच को दोबारा शुरू करने की उम्मीदें जगा दी हैं। यदि जांच हुई तो कटनी नगर निगम के कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस जांच की जद में आएंगे। कहा तो यह भी जाता है कि कुछ जनप्रतिनिधियों के तो चूल्हे भी सिर्फ आउटसोर्स कर्मचारियों के नाम पर होने वाले घोटाले से ही जलते हैं। अब देखना यह है की आधा सैकड़ा से अधिक फर्जी आउटसोर्स कर्मचारियों की आईडी लॉक कराने वाली वर्तमान नगर निगम कमिश्नर तपस्या परिहर कब इस जांच को शुरू कराती हैं। कब जनता के पैसे का होनेवाला बंदरबांट बंद होता है। बाकी जो है सो तो है ही….


