पन्ना। भ्रष्टाचार के खिलाफ पन्ना की विशेष अदालत ने शुक्रवार (19 जून) को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने मिट्टी से भरे ट्रैक्टर को छोड़ने के बदले 35 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के मामले में तत्कालीन प्रभारी नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला और उनके चौकीदार देवीदयाल दहायत को दोषी करार देते हुए 5-5 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने दोनों पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया है।
सजा पाने वाले पूर्व नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला, हरदुआ मोहल्ला (नागौद) निवासी रमाशंकर शुक्ल ‘बाबा जी’ के पुत्र हैं और घटना के समय गुनौर में तैनात थे।
*क्या है पूरा मामला?*
सरकारी वकील मानवेन्द्र सिंह के मुताबिक, यह पूरा मामला साल 2020 का है।
सिली गांव के रहने वाले ब्रजबिहारी प्रजापति अपने खेत से ईंट बनाने के लिए ट्रैक्टर में मिट्टी भरकर ले जा रहे थे।
इसी दौरान गुनौर के तत्कालीन प्रभारी नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला ने ट्रैक्टर को रोककर उसे जब्त कर लिया और थाने में खड़ा करवा दिया।
इसके बाद ट्रैक्टर को छोड़ने के एवज में तहसीलदार रविशंकर शुक्ला ने अपने चौकीदार देवीदयाल दहायत के माध्यम से ब्रजबिहारी से 35,000 रुपये की घूस मांगी।
*किसान ने नहीं टेके घुटने, लोकायुक्त से कराई थी घेराबंदी*
पीड़ित ब्रजबिहारी प्रजापति भ्रष्ट तंत्र के आगे झुकने और रिश्वत देने के मूड में बिल्कुल नहीं थे। वे इस भ्रष्ट अधिकारी को सबक सिखाना चाहते थे। उन्होंने तुरंत इसकी शिकायत सागर लोकायुक्त पुलिस से कर दी। लोकायुक्त की टीम ने जाल बिछाकर इस पूरी घूसखोरी का पर्दाफाश किया था।
अदालत का कड़ा संदेश
* “भ्रष्टाचार समाज को खोखला कर रहा है। ऐसे लोक सेवकों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है जो अपने पद का दुरुपयोग कर जनता को प्रताड़ित करते हैं।” *— विशेष अदालत*, पन्ना
मामले की लंबी सुनवाई और पुख्ता सबूतों के आधार पर विशेष न्यायालय ने शुक्रवार को दोनों आरोपियों को दोषी पाया और उन्हें 5-5 साल की जेल की सजा सुनाते हुए जेल भेज दिया। इस फैसले के बाद से प्रशासनिक गलियारों और भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।


