*योगेश गजभिये पांढुरना*.पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन के क्षेत्र में लगातार उल्लेखनीय कार्य कर रहे पांढुर्णा जिले के वाटर हीरो एवं जल प्रहरी नीरज वानखड़े ने एक बार फिर अपनी अनूठी पहल से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। उन्होंने 108 सीताफल के बीजों को एक ही सीड्स बॉल में समाहित कर देश का सबसे बड़ा सीड्स बॉल तैयार किया, जिसे इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में स्थान प्राप्त हुआ है।
श्री वानखड़े का मानना है कि सीड्स बॉल केवल एक मिट्टी का गोला नहीं, बल्कि भविष्य के हरित भारत का बीज है। लोगों में वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से वे वर्षों से हजारों सीड्स बॉल तैयार कर जंगलों, पहाड़ियों और बंजर भूमि पर फेंकते आ रहे हैं, ताकि प्रकृति स्वयं नए वृक्षों का निर्माण कर सके।
वर्ष 2026 में उन्होंने अपनी संस्था एवं सहयोगियों के साथ मिलकर 50 हजार सीताफल के बीजों तथा 5 हजार बिहाड़ा एवं रीठा के बीजों के सीड्स बॉल तैयार किए हैं। इस प्रकार कुल 55 हजार सीड्स बॉल बनाने का लक्ष्य पूरा कर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
श्री वानखड़े ने बताया कि 50 हजार सीताफल के सीड्स बॉल तैयार करने के पीछे केवल वृक्षारोपण का उद्देश्य नहीं है, बल्कि जंगलों में रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ाना भी है। भविष्य में जब ये सीताफल के वृक्ष फल देंगे, तो स्थानीय ग्रामीणों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा। साथ ही जंगलों में रहने वाले पक्षियों, बंदरों, गिलहरियों तथा अन्य वन्य जीवों को प्राकृतिक भोजन उपलब्ध होगा, जिससे जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा और वन क्षेत्र अधिक समृद्ध बनेंगे।
वृक्षारोपण के साथ-साथ श्री वानखड़े जल संरक्षण के क्षेत्र में भी कई वर्षों से सक्रिय हैं। उनके कार्यों को देखते हुए भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा उन्हें “वाटर हीरो” सम्मान से नवाजा जा चुका है। इसके अतिरिक्त उन्हें जल प्रहरी अवार्ड सहित अनेक राष्ट्रीय एवं सामाजिक सम्मान प्राप्त हुए हैं।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में वेस्ट वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, बोर रिचार्ज, मैजिक पिट निर्माण तथा जल संरक्षण की अन्य तकनीकों को बढ़ावा देकर हजारों लोगों को जल बचाने के लिए प्रेरित किया है। मध्य प्रदेश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर भी वे जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा का संदेश दे रहे हैं।
कोविड-19 महामारी के कठिन दौर में भी उन्होंने समाज सेवा का परिचय देते हुए 65 हजार मास्क बनाकर निःशुल्क वितरण किया था। इतना ही नहीं, उन्होंने देश का सबसे लंबा फेस मास्क तैयार कर अपना नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज कराया था।
स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि श्री नीरज वानखड़े के प्रयास केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी हरित, सुरक्षित और जल समृद्ध भविष्य की मजबूत नींव तैयार कर रहे हैं। उनका जीवन संदेश देता है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो एक व्यक्ति भी समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकता है।


