कहते हैं इस संसार में जो भी चीज बनी है या मौजूद है,,उसका अंत एक निर्धारित समय में निश्चित ही है l चाहे आप कितना भी जतन या पैसा लगाकर कोशिश कर ले l होगा वही जो प्रकृति को मंजूर होगा , क्योंकि परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है l
एक ऐसा ही आस्त्तिव सैकड़ों वर्ष पुराना नीम का पेड़ जो कटनी जिले के रीठी गोल बाजार की शान माना जाता था जो अचानक से 29 मई की साम गिर गया,,l जिससे पेड़ के नीचे बैठे दुकानदारों एवम राहगीर घायल हो गए जिनमे एक घायल को इलाज हेतु जिला अस्पताल भेजा गया है l
पेड़ गिरने की आवाज इतनी तेज थी लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और आस पास के सैकड़ों लोग जमा हो गए l अचानक पेड़ गिरने से आवागमन और विद्युत सप्लाई पूरी तरह से बंद हो गई l खबर मिलते रीठी पुलिस प्रशासन और विद्युत विभाग के कर्मचारी तुरंत पहुंचे l दो तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आवागमन और विद्युत सप्लाई चालू की गई l
स्थानीय बुजुर्गो का कहना है कि कोई पेड़ एक पेड़ नही होता है उसकी भी कई कहानियां और इतिहास गवाह होते है,,l
स्थानीय बुजुर्गों के मुताबिक, 1940/45 के दशक में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसी नीम के पेड़ के नीचे खड़े होकर अंग्रेजों के खिलाफ जनसभा को संबोधित किया था। उस दौर में बड़े मैदानों पर सभा करना जोखिम भरा था, इसलिए क्रांतिकारी ऐसे पुराने पेड़ों के नीचे गुप्त बैठकें करते थे। हालांकि इसका कोई सरकारी दस्तावेज या फोटो उपलब्ध नहीं है, ये मौखिक इतिहास पीढ़ियों से बुजुर्गो से सुनते चले आ रहे है।
कुछ स्थानीय बुजुर्गो का मानना है की आज रीठी गोल बाजार की शान नीम का पेड़ का अस्तित्त्व समाप्त हो गया l
वो हमारे बचपन की यादें कि किस तरह रामलीला आने पर इसी पेड़ पर चढ़ कर रामलीला देखा और छुपा छुपाई का खेल खेला करते थे l बचपन से इसे देखते आ रहे थे। आज लगता है घर का बुजुर्ग चला गया।
इसीलिए कहा गया है जो भी इस संसार में आया है या बना है वह एक दिन समाप्त होकर ही रहेगा l चाहे आप जितने भी शक्तिशाली बन जाओ,,l क्योंकि परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है
हरिशंकर बेन,,,


