योगेश गजभिये पांढुरना*.नगर में मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजना अंतर्गत लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न वार्डों में कराए जा रहे निर्माण कार्य एक बार फिर विवादों में आ गए हैं। नगर पालिका के सुपर विजन और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ताजा मामला सन्तोषी माता वार्ड का है, जहां निर्माणाधीन एंड-बैंड नाली अब पूरे नगर में चर्चा का विषय बन चुकी है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर दिखाई दे रहा है। एक ओर विकास कार्यों के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर घटिया निर्माण और लापरवाही खुलकर सामने आ रही है।
संतोषी माता वार्ड के इंदिरा आवास के रहवासियों की बढ़ी परेशानी:-
वार्ड में नाली निर्माण शुरू करने से पहले ठेकेदार द्वारा इंदिरा आवास योजना के मकानों के पास बनी ढलान और सीढ़ियों को तोड़ दिया गया। इस कारण वहां रहने वाले परिवारों को घर तक आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रहवासियों का कहना है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए सीढ़ियां हटाना गैरजिम्मेदाराना कदम है।
बिना बेस डाले खड़ी कर दी नाली:-
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा नाली निर्माण में तकनीकी मापदंडों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। बताया जा रहा है कि कई स्थानों पर बिना मजबूत बेस डाले ही लोहे का पिंजरा खड़ा कर निर्माण शुरू कर दिया गया। निर्माण में 8 एमएम और 5 एमएम सरिया का उपयोग किया जा रहा है, जबकि लोहे की बार का अंतर लगभग 12 से 15 इंच रखा गया है, जो गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
लोगों का कहना है कि केवल चार लोहे के बार के सहारे नाली खड़ी की जा रही है। निर्माण कार्य के दौरान ना तो वाइब्रेटर मशीन का उपयोग किया जा रहा है और ना ही सामग्री की सही तरीके से थसाई की जा रही है। परिणामस्वरूप नाली कई स्थानों पर उबड़-खाबड़ बन रही है।

सेंटरिंग हटते ही दिखने लगे गड्ढे:-
रहवासियों ने आरोप लगाया कि जैसे ही नाली की सेंटरिंग हटाई गई, कई स्थानों पर गड्ढे और दरारें दिखाई देने लगीं। इसके बाद ठेकेदार के कर्मचारी लीपापोती कर उन खामियों को छिपाने में जुट गए। टेढ़ी-मेढ़ी और असंतुलित नाली निर्माण अब पूरे पांढुर्णा में कौतूहल और चर्चा का विषय बना हुआ है।
निजी व्यक्ति की नाली बनी मिसाल:-
सबसे हैरानी की बात यह है कि उसी क्षेत्र में एक निजी व्यक्ति द्वारा अपनी ले आउट की जमीन पर लगभग 300 से 400 फीट लंबी नाली का निर्माण कराया जा रहा है, जिसकी गुणवत्ता नगर पालिका के निर्माण से कहीं बेहतर बताई जा रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार निजी निर्माण में लेवल, डिजाइन और मजबूती का विशेष ध्यान रखा गया है। वहां लोहे के पिंजरे में 5 से 6 इंच के अंतर पर बार लगाए गए हैं तथा 8 एमएम और 10 एमएम सरिया का उपयोग किया जा रहा है। निर्माण कार्य व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण नजर आ रहा है।
नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल:-
अब जनता सवाल उठा रही है कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नगर पालिका गुणवत्तापूर्ण निर्माण क्यों नहीं करा पा रही। लोगों का कहना है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि ठेकेदार पर कार्रवाई करने का साहस तक नहीं जुटा पा रहे।
नगर में चर्चा है कि घटिया निर्माण के बावजूद ना तो ठेकेदार को नोटिस दिया जा रहा है और ना ही निर्माण कार्य की सही निगरानी की जा रही है। इससे यह संदेह और गहरा रहा है कि विकास कार्यों के नाम पर जनता के पैसों से समझौता किया जा रहा है।
जनता ने की जांच और कार्रवाई की मांग:-
वार्डवासियों ने मांग की है कि नाली निर्माण की तकनीकी जांच कराई जाए तथा गुणवत्ता में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार, इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में यह नाली हादसों और जलभराव का बड़ा कारण बन सकती है।


