उमरियापान:- भीषण गर्मी के चलते उमरियापान-ढीमरखेड़ा क्षेत्र में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। क्षेत्र की जीवनदायिनी मानी जाने वाली बेलकुण्ड नदी पूरी तरह सूखकर मैदान में तब्दील हो गई है। नदी में पानी नहीं होने से जहां ग्रामीणों को पेयजल के लिए परेशान होना पड़ रहा है, वहीं वन्यजीवों और मवेशियों के सामने भी पानी का संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि बेलकुण्ड नदी उमरियापान-ढीमरखेड़ा क्षेत्र के पांच दर्जन से अधिक गांवों से होकर गुजरती है। पोंडी खुर्द, शुक्ल पिपरिया, बरही,कछार गांव छोटा, घुघरी, घुघरा, बिछिया, बरौदा, धनवाही सहित जिन गांवों से नदी निकलती है, वहां के लोग नदी के पानी का उपयोग घरेलू जरूरतों के साथ खेती-किसानी में भी करते हैं। किसान नदी के पानी से फसलों एवं सब्जियों की सिंचाई करते रहे हैं। नदी में पानी रहने से आसपास के क्षेत्रों का भू-जल स्तर भी बना रहता था, लेकिन इस बार नदी पूरी तरह सूख जाने से जलस्तर तेजी से नीचे पहुंच गया है। नदी के सूखने का असर अब गांवों के हैंडपंपों और कुओं पर भी दिखाई देने लगा है। कई हैंडपंप पानी देने के बजाय हवा उगल रहे हैं, जिससे ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले गर्मी में नदी का जलस्तर घटता था, लेकिन बीते कुछ वर्षों से स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। अब नदी में पानी सूख गया है,अधिकांश हिस्सों में सिर्फ रेत ही नजर आती है। ग्रामीणों का आरोप है कि नदी में पानी नहीं होने का फायदा रेत माफिया उठा रहे हैं। सूखी नदी से अवैध रूप से रेत निकालकर बाजारों में ऊंचे दामों पर बेची जा रही है। इससे नदी का प्राकृतिक स्वरूप भी प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों की आजीविका पर पड़ रहा असर :- क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि पीने के पानी के लिए उन्हें दूर-दूर तक भटकना पड़ रहा है। महिलाएं और बच्चे सुबह से ही पानी की व्यवस्था में जुट जाते हैं। पशुपालकों को मवेशियों के लिए पानी उपलब्ध कराने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं नदी और नालों के सूखने से वन्यजीव भी पानी की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की ओर पहुंच रहे हैं।ग्रामीणों ने बताया कि शासन-प्रशासन द्वारा हर वर्ष बरसात से पहले जल संरक्षण और पानी रोकने के लिए विभिन्न अभियान चलाए जाते हैं तथा लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन गर्मी आते-आते जलस्रोत पूरी तरह सूख जाते हैं। नदी में पानी नहीं रहने से आसपास के लोग फल एवं सब्जियों की खेती भी नहीं कर पा रहे हैं। कई किसान मूंग और उड़द जैसी फसलों की बुआई से भी दूरी बना रहे हैं, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है।
नदी में पानी छोड़ने की मांग:- क्षेत्र के ग्रामीणों ने बताया कि इसी क्षेत्र से गुजरने वाली नर्मदा नहर का पानी बेलकुण्ड नदी में छोड़ने शासन प्रशासन से अनेकों दफा मांग की गई है। विभागीय अधिकारियों को पत्राचार भी किया गया,लेकिन ऐसी कोई व्यवस्था नहीं बनाई गई। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अधिकारी इस गर्मी में नहरों में भी पानी नहीं छोड़ा है। जिससे कि नहर में भी पानी नहीं है। क्षेत्र की नहरों में भी पानी नहीं होने से ग्रामीणों की परेशानी ज्यादा बढ़ गई है।
रिपोर्टर राजेंद्र कुमार चौरसिया धीमरखेडा कटनी


