नई दिल्ली। अखिल भारतीय हिन्द क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश त्रिपाठी ने देशभर की अदालतों में वर्षों से लंबित निष्पादन (Execution) याचिकाओं के शीघ्र निस्तारण को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश को एक विस्तृत सुझाव पत्र सौंपा है। यह सुझाव पत्र सुप्रीम कोर्ट द्वारा 19 जनवरी 2026 को पारित आदेश के क्रम में दिया गया है, जिसमें न्यायिक सुधारों से संबंधित सुझाव देने की अनुमति प्रदान की गई थी। 
कमलेश त्रिपाठी ने अपने सुझाव पत्र में कहा कि देश की विभिन्न जिला अदालतों एवं उच्च न्यायालयों में लाखों निष्पादन याचिकाएं वर्षों से लंबित हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट पूर्व में इन्हें छह माह के भीतर निपटाने के स्पष्ट निर्देश दे चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का कई स्थानों पर पालन नहीं हो रहा है, जिससे आम नागरिकों को न्याय मिलने में अत्यधिक देरी हो रही है।
सुझाव पत्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि न्यायालय ने सभी उच्च न्यायालयों को लंबित निष्पादन प्रकरणों की जानकारी एकत्र कर छह माह के भीतर उनके निस्तारण के लिए प्रशासनिक आदेश जारी करने के निर्देश दिए थे।
कमलेश त्रिपाठी ने मुख्य न्यायाधीश से मांग की है कि देशभर की अदालतों में लंबित निष्पादन मामलों के निस्तारण हेतु सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का कड़ाई से पालन कराया जाए तथा आदेशों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों एवं न्यायिक अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाए।
सुझाव पत्र के साथ ऐसे 13 मामलों की सूची भी संलग्न की गई है, जिनमें निष्पादन याचिकाएं 25 से 30 वर्षों से लंबित बताई गई हैं।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी 2026 को कमलेश त्रिपाठी द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायिक सुधारों के संबंध में सुझाव देने की स्वतंत्रता प्रदान की थी। इसके बाद यह सुझाव पत्र मुख्य न्यायाधीश को सौंपा गया।


