कटनी। जिला अधिवक्ता संघ, कटनी के पुस्तकालय प्रभारी वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप नायक ने देश की सर्वोच्च अदालत में ऐतिहासिक कानूनी लड़ाई लड़कर कटनी के अधिवक्ताओं का मान-सम्मान बहाल कराया है। पूरे मध्य प्रदेश में कटनी इकलौता ऐसा जिला बना, जिसने स्टेट बार काउंसिल द्वारा नाम जोड़ने से मना किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट जाकर अपने सदस्यों के हक में फैसला कराया।
253 नामों का संघर्ष और स्टेट बार का इनकार
मामले के अनुसार, जिला अधिवक्ता संघ, कटनी की ओर से मतदाता सूची में शामिल करने हेतु 253 अधिवक्ताओं के नाम भेजे गए थे। जिला संघ के निरंतर प्रयासों के बाद लगभग 180 नाम तो जोड़ लिए गए, लेकिन शेष 52 अधिवक्ताओं के नाम शामिल करने से स्टेट बार काउंसिल ने साफ तौर पर मना कर दिया था। स्थानीय स्तर पर बात न बनने पर इन अधिवक्ताओं के मताधिकार और सम्मान की रक्षा के लिए एडवोकेट संदीप नायक ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश, नियमानुसार जुड़ेंगे नाम
एडवोकेट संदीप नायक द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए माननीय उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। न्यायालय ने आदेश दिया कि शेष 52 अधिवक्ताओं के नाम नियमानुसार वोटर लिस्ट में जोड़े जाएं। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि
ये अधिवक्ता 7 मई तक अपनी तकनीकी कमियों को नियमों के तहत पूर्ण करें।संशोधित सूची जारी कर इन सभी का नाम मतदाता सूची में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।ये सभी सदस्य 12 मई को होने वाले चुनाव में गरिमा के साथ अपना मतदान कर सकेंगे।
कटनी ने पेश की पूरे प्रदेश में मिसाल
जानकारी देते हुए याचिकाकर्ता संदीप नायक ने कहा,जब स्टेट बार काउंसिल ने हमारे साथियों के नाम जोड़ने से स्पष्ट मना कर दिया, तब हमारे पास सत्य की लड़ाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ही एकमात्र रास्ता था। पूरे मध्य प्रदेश में केवल कटनी जिला ही अपने अधिवक्ताओं के सम्मान के लिए दिल्ली तक गया। हमारा उद्देश्य केवल यह था कि हर पात्र अधिवक्ता का नाम नियमानुसार सूची में हो और उनके लोकतांत्रिक अधिकार सुरक्षित रहें।संदीप नायक की इस ऐतिहासिक पहल और सुप्रीम कोर्ट से मिली इस बड़ी जीत पर जिला अधिवक्ता संघ के समस्त पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने हर्ष व्यक्त करते हुए इसे न्याय की जीत बताया है।


