कटनी जिले में परिवहन विभाग एक बार फिर सुर्खियों में है। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) से जुड़े एक अधिकारी पर लगे आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला अब केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि पूरे सिस्टम पर चर्चा का विषय बन चुका है।
सूत्रों के अनुसार आर्थिक अनियमितताओं को लेकर आर्थिक अपराध अन्वेषण संगठन (EOW) ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में कार्रवाई की है। छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में संपत्ति सामने आने की बात कही जा रही है। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री से मामला और गंभीर हो गया। एजेंसी द्वारा करोड़ों रुपये की संपत्ति कुर्क किए जाने की जानकारी सामने आई है, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग की आशंकाएं भी मजबूत हुई हैं।
वहीं जमीनी स्तर पर भी परिवहन विभाग को लेकर कई शिकायतें सामने आ रही हैं। ट्रांसपोर्टरों और वाहन चालकों का आरोप है कि फिटनेस, परमिट और चेकिंग के नाम पर अवैध वसूली की जाती है। ओवरलोडिंग के मामलों में दबाव बनाकर पैसे लेने और कुछ मामलों में दुर्व्यवहार की शिकायतें भी सामने आई हैं, जिससे विभाग की छवि प्रभावित हो रही है।
यह भी बताया जा रहा है कि इससे पहले भी संबंधित अधिकारी विवादों में रह चुका है। पुराने मामलों के सामने आने से लोगों के बीच असंतोष और बढ़ गया है, हालांकि उन मामलों में क्या कार्रवाई हुई, यह स्पष्ट नहीं है।
इस पूरे प्रकरण में राजनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी सवाल उठ रहे हैं। जिले के प्रभारी मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के कार्यकाल में ऐसे आरोप सामने आने से प्रशासनिक निगरानी पर भी चर्चा तेज हो गई है।
स्थानीय स्तर पर आम आदमी पार्टी के नेता एडवोकेट अनिल सिंह सेंगर ने मामले को उठाते हुए संबंधित अधिकारी को हटाने और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आम लोगों और परिवहन कारोबारियों का भरोसा वापस नहीं आएगा।
यह मामला एक बड़े सवाल की ओर इशारा करता है—क्या भ्रष्टाचार के आरोपों पर कार्रवाई की प्रक्रिया अब भी धीमी है? विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शी जांच, सख्त निर्णय और समयबद्ध कार्रवाई ही ऐसे मामलों में विश्वास बहाल कर सकती है। मीडिया सूत्रो पर अधारित


