रिपोर्टर सीमा कैथवास
नर्मदापुरम। नगर के कोठी बाजार पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस के बाजू से पुराने कामाख्या गार्डन वाली सहित महत्वपूर्ण नजूल भूमि सिविल लाइन नजूल सीट 46, प्लॉट नंबर 11/1 कुल रकबा 124380 वर्गफुट भूमि के पारिवारिक बटवारा के अनुसार नामांकन के मामले में न्यायालय
नजूल अधिकारी नर्मदापुरम में चल रही सुनवाई उपरांत महत्वपूर्ण फैसला आया है। नजूल अधिकारी देवेंद्र प्रताप सिंह द्वारा प्रकरण से संबंधित सभी पक्षों को सुनने के उपरांत 21 अप्रैल को आदेश जारी किया है।प्रकरण में 30 हितबद्ध पक्षकारों सहित आपत्तिकर्ता आनंद मिश्रा निवासी प्रेमकुटी सदर बाजार नर्मदापुरम को भी सुना गया है। उक्त आदेश 40 पेज सहित 61 बिंदुओं पर आधारित है। जिसमें न्यायालय नजूल अधिकारी द्वारा आदेश 9/11/2007 को निष्प्रभावी घोषित करते हुए नजूल अभिलेख में उक्त आदेश के पूर्व की स्थिति में दर्ज प्रविष्टियां अनुसार वर्तमान नजूल अभिलेख में अद्यतित किए जाने का आदेश पारित किया है। इसी के साथ समस्त हितबद्ध पक्षकार वादग्रस्त भूमि नगर नर्मदापुरम नजूल सीट क्रमांक 46, प्लॉट नंबर 11 /1 , रकबा 124380 वर्गफुट के संबंध में जारी स्थाई नजूल पट्टे पर अपने उपयोग अधिकतर निर्धारण के लिए सक्षम व्यवहार न्यायालय में वाद प्रस्तुत करने हेतु स्वतंत्र किए हैं। माननीय उच्च न्यायालय मध्य प्रदेश जबलपुर में प्रचलित रिट अपील क्रमांक 2811/ 2025, मां कामाख्या देवी एसोसिएट्स विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन व अन्य में पारित आदेश दिनांक 11/02/2026 के अनुपालन में प्रस्तुत पुनर्विलोकन प्रकरण में पारित आदेश का क्रियान्वयन मा. उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश जबलपुर में प्रचलित रिट अपील क्रमांक 2811/2025, मां कामाख्या देवी एसोसिएट्स विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन व अन्य के अधीन किया जाता है। दूसरी तरफ प्रकरण में आपत्तिकर्ता आनंद मिश्रा के अधिवक्ता Adv मनीष सराठे ने बताया कि उक्त विवादग्रस्त नजूल भूमि नगर के पुराने कामाख्या गार्डन वाले स्थान सहित की भूमि है। जिसके संबंध में न्यायालय नजूल अधिकारी द्वारा आदेश पारित किया गया है। उक्त आदेश माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के आदेश के पालन में निर्णय लिया गया है। इसके संबंध में समाचार पत्रों के माध्यम से इश्तहार जारी किया गया था जिस पर हमने अपने पक्षकार आनंद मिश्रा की ओर से उपस्थित होकर आपत्ति दर्ज कराई थी। हमने उषा तिवारी व उनके वारसान के हित संरक्षण के लिए आपत्ति दर्ज कराई थी। जिस पर नजूल अधिकारी द्वारा सभी हितबद्ध पक्षकारों को सुनवाई का अवसर भी दिया गया। इसके बाद उक्त निर्णय सामने आया है।


