विद्यालय में महान शिक्षाविद एवं डीएवी आंदोलन के प्रेरणास्रोत महात्मा हंसराज जी की जयंती बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं महात्मा हंसराज जी के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ।
इस अवसर पर विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती संजना मधुकर जी एवं शिक्षकों ने अपने उद्बोधन में महात्मा हंसराज जी के जीवन एवं उनके त्यागपूर्ण योगदान पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को उनके आदर्शों पर चलने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि महात्मा हंसराज ने शिक्षा को समाज सुधार का सशक्त माध्यम बनाया और सादा जीवन, उच्च विचार का संदेश दिया।उन्होंने ऐसी शिक्षा प्रणाली विकसित की जिसमें आधुनिक विषयों के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, नैतिकता और वैदिक ज्ञान को भी महत्व दिया गया।उनके प्रयासों से डीएवी संस्थानों का विस्तार हुआ और आज यह देश-विदेश में एक बड़े शैक्षिक नेटवर्क के रूप में स्थापित है।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा भाषण,निबंध लेखन एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी दी गईं, जिनमें उनके जीवन और आदर्शो को सुंदर रूप में प्रस्तुत किया गया।
विद्यार्थियों द्वारा उनके जीवन पर आधारित लघु नाटक भी प्रस्तुत किया गया जिसे सभी ने सराहा।
अंत में सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। महात्मा हंसराज का योगदान डीएवी के लिए आधारशिला के समान है। उनके आदर्श आज भी डीएवी संस्थानों में जीवंत हैं और विद्यार्थियों को प्रेरित करते हैं।कार्यक्रम का समापन डी ए वी गान के साथ हुआ।


