अक्षय तृतीया का रहस्य: क्यों कहते हैं इसे ‘अबूझ मुहूर्त’?
धन, धर्म और सौभाग्य का पर्व: जानिए अक्षय तृतीया की महिमा
अक्षय तृतीया, जिसे आखा तीज भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में सबसे शुभ और ‘अबूझ’ मुहूर्तों में से एक है। ‘अक्षय’ का अर्थ है जिसका कभी क्षय (नाश) न हो।
अक्षय तृतीया से कई महत्वपूर्ण घटनाएँ जुड़ी हैं, जो इसे विशेष बनाती हैं:
1. युधिष्ठिर और अक्षय पात्र
वनवास के दौरान जब पांडवों के पास भोजन की कमी हुई, तब भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को ‘अक्षय पात्र’ प्रदान किया था। इस पात्र की विशेषता यह थी कि इसमें से भोजन कभी समाप्त नहीं होता था। यह घटना इसी दिन हुई थी, जो यह दर्शाती है कि इस दिन किया गया दान और पुण्य कभी समाप्त नहीं होता।
2. सुदामा और श्रीकृष्ण का मिलन
गरीब ब्राह्मण सुदामा जब अपने मित्र श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुँचे थे, तो उनके पास भेंट में देने के लिए केवल दो मुट्ठी चावल थे। भगवान ने सुदामा के प्रेम को स्वीकार किया और बिना माँगे उन्हें अक्षय सुख-संपत्ति प्रदान की। यह मित्रता और निस्वार्थ भक्ति का प्रतीक है।
3. गंगा अवतरण और अन्नपूर्णा का जन्म
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं।
इसी दिन माता अन्नपूर्णा का जन्म भी हुआ था, जो संसार के पोषण का आधार हैं।
अक्षय तृतीया की महत्ता
शास्त्रों में अक्षय तृतीया का स्थान बहुत ऊंचा है। इसकी महत्ता के मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
सर्वसिद्ध मुहूर्त: इस दिन किसी भी शुभ कार्य (विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार की शुरुआत) के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। यह पूरा दिन स्वयं में एक सिद्ध मुहूर्त है।
सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ: माना जाता है कि सतयुग और त्रेतायुग का प्रारंभ इसी तिथि से हुआ था।
दान का फल: इस दिन किया गया दान (विशेषकर जल, अन्न, सत्तू, और वस्त्र) अक्षय फल प्रदान करता है। माना जाता है कि इस दिन किए गए पुण्य का लाभ इस जन्म के साथ-साथ अगले जन्मों में भी मिलता है।
सोना खरीदना: लोग इस दिन सोना या चांदी खरीदना अत्यंत शुभ मानते हैं। ऐसा विश्वास है कि इससे घर में लक्ष्मी का स्थाई निवास होता है और संपत्ति में “अक्षय” वृद्धि होती है।
बद्रीनाथ के कपाट: चारधाम यात्रा में महत्वपूर्ण बद्रीनाथ धाम के कपाट भी अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर ही खोले जाते हैं।
इस दिन क्या करना चाहिए?
पवित्र स्नान: संभव हो तो गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें।
पूजा: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त रूप से पूजा करें।
पितृ तर्पण: अपने पितरों के नाम से जल का दान करना इस दिन बहुत फलदायी माना जाता है।
सत्तू का सेवन: उत्तर भारत में इस दिन सत्तू खाने और दान करने की विशेष परंपरा है।
अक्षय तृतीया केवल धन बढ़ाने का दिन नहीं है, बल्कि यह अपने अच्छे कर्मों और भक्ति को “अक्षय” बनाने का अवसर है।
“जय श्री राधे”


