रिपोर्टर सीमा कैथवास
नर्मदापुरम। लोक शिक्षण संचालनालय एवं जनजातीय कार्य आयुक्त द्वारा प्रदेश के समस्त नॉन टीईटी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने के निर्देश दिए हुए हैं। जारी उक्त आदेश के बाद शिक्षकों में आक्रोश व्याप्त हो गया है और शिक्षक संगठनों ने पात्रता परीक्षा का विरोध शुरू कर दिया है। शनिवार को पीपल चौक पर अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ब्लॉक नर्मदापुरम के बैनर तले शिक्षकों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा। राज्य शिक्षक संघ
नर्मदापुरम कार्यकारी जिलाध्यक्ष कुंवर सिंह वाडिवा ने नॉन टीईटी शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करने हेतु बाध्य किया जाना अधिसूचना के प्रावधानों एवं न्यायालय के निर्णय की भावना के विपरीत है। जारी आदेशों को तत्काल निरस्त करते हुए प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त कर उन्हें मानसिक तनाव से राहत प्रदान करना चाहिए। जबकि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षक परिषद की अधिसूचना के अनुसार सितंबर 2001 के पश्चात नियुक्त संविदा शाला शिक्षक और पूर्व में नियुक्त शिक्षा कर्मी व संविदा शाला शिक्षक तथा वर्ष 2011 से 2014 से मध्य गुरुजी से संविदा शिक्षक के रूप में नियुक्त शिक्षकों को टीईटी परीक्षा से छूट प्रदान की गई है। इतने वर्ष नौकरी करने के बाद आज शिक्षक कैसे पात्रता परीक्षा की तैयारी करेंगे ? इस आदेश को लेकर शिक्षकों में भारी मानसिक तनाव और आक्रोश भी है। मुख्यमंत्री को उक्त आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों को मानसिक तनाव से राहत प्रदान करना चाहिए।


