रिपोर्टर सीमा कैथवास
नर्मदापुरम। नर्मदापुरम मुख्यालय पर एसएनजी स्कूल में आयोजित तीन दिवसीय जिला स्तरीय पुस्तक मेले में शुक्रवार शाम को बिजली गुल हो जाने से जहां स्कूली बच्चों के माता-पिता पुस्तक और कॉपियों के लिए परेशान होते रहे तो वही
अंधेरे के कारण कई स्टॉल संचालकों ने अपने स्टाल बंद कर दिए, जबकि कुछ स्टॉल संचालक कॉपी और स्टेशनरी मोबाइल की रोशनी में बेचने को मजबूर हुए।विक्रेताओं का कहना रहा कि मेले का आयोजन शाम 8 बजे तक होना चाहिए क्योंकि गर्मी के कारण दोपहर में ग्राहकी ही नहीं होती है। सभी स्टॉल्स पर जिन स्कूलों की पुस्तक मिलती हैं उनके संबंध में कोई भी सूचना नहीं लगाई गई थी, जिससे पालक गण संबंधित स्कूल की पुस्तकों के लिए परेशान होते रहे। बताया जाता है कि शहर के बड़े स्कूलों की पुस्तक चिन्हित दुकानदारों के पास ही उपलब्ध हैं। जो की पालकगणो को पूरा सेट लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं, एक पालकगण ने बताया सर्वाइट स्कूल की क्लास 06 में उनके बेटे के लिए दो बुक जीके और कंप्यूटर नहीं मिली, दुकान संचालक का कहना था कि पूरा सेट लेना पड़ेगा। वही पुस्तक मेले में स्कूल ड्रेस को लेकर एकमात्र स्टॉल नजर आया। जबकि शहर में बड़ी संख्या में निजी स्कूल संचालित है परंतु अधिकांश स्कूलों की ड्रेस निर्धारित जगह पर मिलती है, जिसके लिए पालक मजबूर होते हैं। कुछ दुकान संचालकों का कहना रहा कि स्कूल संचालकों द्वारा बुक की लिस्ट दिसंबर में उपलब्ध करा दी जानी चाहिए क्योंकि कुछ स्कूल का सिलेबस बदल जाता है और पब्लिशर के नाम बदलने से समय पर बुक नहीं मिल पाती हैं, जिससे बच्चे और उनके गार्जियन परेशान होते हैं। कुछ गार्जियनों का कहना था कि सीबीएसई स्कूलों में सेंट्रल स्कूल की तरह सीबीएसई, एनसीईआरटी की ही पुस्तकों से पढ़ाई करनी चाहिए जबकि यहां पर पैटर्न का उपयोग और पुस्तकों में पब्लिशर्स का उपयोग किया जाता है। जिससे काफी समस्या उत्पन्न होती है इस विषय पर भी जिला प्रशासन सहित जिला शिक्षा अधिकारी को ध्यान देना चाहिए। स्कूल ड्रेस को लेकर भी जिला प्रशासन को संज्ञान लेना चाहिए, जिसका निर्धारण दिसंबर जनवरी माह में हो जाना चाहिए। गार्जियन ने पुस्तक मेले के आयोजन पर प्रशासन का आभार भी माना है कि ऐसे आयोजन होते रहना चाहिए। वही गार्जियनों ने कहा कि पुस्तक मेला तीन दिवसीय की जगह एक सप्ताह का आयोजन होना चाहिए जबकि तीन दिवसीय मेले का शनिवार को समापन हो जाएगा। वहीं सूत्रों की माने तो शहर के प्रतिष्ठित स्कूलों की पुस्तक निर्धारित दुकानदारों के पास ही है और उन्हीं के पास से पालक गणों को पूरा सेट लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। उन संचालकों की दुकानों पर पालक गणों की भीड़ देखी जा सकती है। जहां वह पुस्तक के साथ कॉपियां भी लेते हुए दिखेंगे। बड़ा सवाल यह भी है कि शहर के प्रतिष्ठित स्कूलों की पुस्तक वर्षों से निर्धारित जगह क्यों मिल रही हैं ? यह भी चर्चा का विषय है। क्या स्कूल संचालक दूसरे दुकानदारों को पुस्तकों की सूची निर्धारित समय में नहीं देते हैं पर भी सवाल हैं? वहीं जिला शिक्षा अधिकारी एलएन प्रजापति ने बताया कि स्कूली बच्चों को एक ही स्थान पर बुक, स्टेशनरी, बैग और स्कूल यूनिफॉर्म मिल सके इसलिए शासन ने पुस्तक मेला लगाने के आदेश दिए हैं। नर्मदापुरम में दो से चार अप्रैल तक जिला स्तरीय आयोजन किया है। वही कोई भी पुस्तक विक्रेता बुक का पूरा सेट लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकता है, ऐसी शिकायत मिलने पर संबंधित बुक संचालक के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। यदि किसी पालक गण को दो पुस्तक की जरूरत है तो वह दो पुस्तक ही खरीद सकता है।


