कटनी – स्वामी विवेकानंद शासकीय महाविद्यालय स्लीमनाबाद में व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत स्नातक स्तर के विद्यार्थियों को प्राचार्या डॉ सरिता पांडे के मार्गदर्शन में जैविक कृषि विशेषज्ञ रामसुख दुबे द्वारा जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
प्रशिक्षण के क्रम में विद्यार्थियों को कम लागत से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए जीरो बजट फार्मिंग के अंतर्गत जैव उर्वरकों एवं जीवाणु कल्चर का उपयोग का तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया। बताया गया कि इसके अंतर्गत उर्वरता के प्रबंधन और पोषक तत्वों के निरंतर उपलब्धता बनाए रखने हेतु जैव उर्वरकों जैसे राइजोबियम, एजैक्टोबेक्टर आदि अत्यंत उपयोगी आदान है। स्थानीय जलवायु के आधार पर कुछ ऐसे सूक्ष्मजीवों द्वारा उर्वरक तैयार किए जा रहे हैं जो अलग-अलग स्थान और जलवायु में कारगर सिद्ध हुए हैं। यह जीवाणु आदान अधिक प्रभावित हैं। अतः खेती की प्रत्येक अवस्था में तथा सभी फसलों में इनका प्रयोग करना सुनिश्चित करें।
प्रशिक्षण में बताया गया कि नत्रजन स्थिरीकरण करने वाले जैव उर्वरक के अंतर्गत दलहनी फसलों के लिए राइजोबियम सूक्ष्मजीवाणु तथा गैर दलहनी फसलों के लिए अजेक्टोबैक्टर, एजोस्पैरिलियम, ऐसीटोबैक्टर, एजोला एवं नील हरित शैवाल आदि उपयोग में लाते हैं, जो मृदा में वायुमंडलीय नाइट्रोजन स्थिरीकरण करके पौधों को उपलब्ध कराने में सहयोग करते हैं। इसके अतिरिक्त फास्फोरस घोलक प्रदान करने वाले जैव उर्वरक फास्फेटिका तथा फास्फोरस अवशोषक का कार्य करने वाले माइक्रोराइजा का उपयोग फसलों में बीज उपचार भूमि उपचार जड़ एवं कंद उपचार तथा नर्सरी उपचार का तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में उगरा जड़ सड़न, पौध गलन, कंडवा आदि रोगों के नियंत्रण के लिए जैविक फफूंद नाशक दवा ट्राईकोडरमा विरडी की जानकारी भी दी गई।


