रिपोर्टर सीमा कैथवास
नर्मदापुरम। नर्मदापुरम जिले में नर्मदा नदी के किनारों पर पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए इंडियन ग्रामीण सर्विसेस IGS द्वारा सामुदायिक सहभागिता से एक सराहनीय पहल की जा रही है। संस्था के प्रयासों से ग्राम आहारखेड़ा और धांसी क्षेत्र में नदी किनारे बड़े पैमाने पर पौधारोपण कर हरियाली विकसित की गई है। इस पहल के अंतर्गत 26 किसानों ने अपनी लगभग 32 एकड़ भूमि स्वेच्छा से खेती से मुक्त कराकर नर्मदा किनारे पौधारोपण के लिए समर्पित की। इसके बाद जनअभियान परिषद, ग्राम पंचायत, TNC, हरित भारत टीम और
जिला प्रशासन के सहयोग से इस अभियान को व्यापक रूप दिया गया। वर्तमान में आसपास के 43 गांवों में लगभग 378 हेक्टेयर क्षेत्र में 2 लाख से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। इन पौधों में बांस,करंजी, पीपल, बरगद,नीम,सीसम सहित कई स्थानीय प्रजातियां शामिल हैं, जिनसे नर्मदा किनारों पर एक छोटा जंगल विकसित हो चुका है। इससे मिट्टी के कटाव में कमी आई है और बाढ़ के प्रभाव को कम करने में भी मदद मिल रही है।स्थानीय किसानों और ग्रामीणों की भागीदारी में दिनेश सिंह, मनमोहन सिंह,संतराम, महाराज सिंह और मंटू सिंह सहित अनेक ग्रामीणों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं रोहित सिंह राजपूत और अनिल यादव ग्रामीण पौध रक्षक के रूप में पौधों के संरक्षण और देखभाल में लगातार महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। किसानों को प्रोम,जीवामृत,दस पत्तों का अर्क,केंचुआ खाद तथा येलो स्टिकी ट्रैप और फेरोमोन ट्रैप जैसे जैविक उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। IGS के रीजनल हेड हरिओम गोस्वामी ने बताया कि यह पहल केवल संस्था का प्रयास नहीं है, बल्कि स्थानीय समुदाय, पंचायत प्रतिनिधियों सहित जनअभियान परिषद,TNC, हरित भारत टीम और जिला प्रशासन के सहयोग से संभव हो पाया है। इस कार्य में उनकी टीम के सदस्य शशिकांत श्रोती,सुधीर यादव,अनिल यादव,रोहित राजपूत द्वारा फील्ड स्तर पर ग्रामीणों को जागरूक करने, पौधारोपण गतिविधियों के समन्वय और संरक्षण कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है। आज यह पहल नर्मदापुरम जिले में समुदाय आधारित पर्यावरण संरक्षण का एक प्रेरक मॉडल बन चुकी है। इस मॉडल को देखने और समझने के लिए देश-विदेश से भी लोग यहां पहुंच रहे हैं और इसे अन्य क्षेत्रों में अपनाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।


