मार्च के महीने में जहां तापमान लगातार बढ़ रहा है और गर्मी ने अभी से लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया है, वहीं सरकारी अस्पतालों की लापरवाही भी सामने आने लगी है। चिलचिलाती गर्मी के बीच अस्पताल में भर्ती मरीजों के बेड से चादर गायब होना व्यवस्था की हकीकत को उजागर करता है।
सरकार की ओर से भले ही अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाओं के दावे किए जाते हों, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है। अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए बेड तो उपलब्ध हैं, लेकिन उन पर बिछाने के लिए चादर तक नहीं है। ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल में इलाज कराने आए मरीजों का कहना है कि यहां बेड तो मिल जाता है, लेकिन उस पर बिछी चादर गायब रहती है। मजबूरी में कई मरीज अपने घर से चादर लाकर इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। वहीं कुछ मरीज बिना चादर के ही बेड पर लेटने को मजबूर हो जाते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा भी बना रहता है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पतालों के लिए हर साल बजट जारी किया जाता है ताकि मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। लेकिन इसके बावजूद अस्पतालों में मूलभूत व्यवस्थाएं तक नहीं मिल पाना कई सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल की व्यवस्थाएं सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाती हैं। जब कभी किसी बड़े अधिकारी का निरीक्षण होने वाला होता है तो आनन-फानन में व्यवस्थाएं दुरुस्त कर दी जाती हैं, लेकिन निरीक्षण खत्म होते ही स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है।
अस्पताल में मौजूद बेड की स्थिति को देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि मरीजों के लिए किस तरह की व्यवस्थाएं हैं। कई बेड ऐसे हैं जिन पर चादर तक नहीं बिछी हुई है। यह तस्वीरें अस्पताल की व्यवस्थाओं की पोल खोलने के लिए काफी हैं।
जहा मरीजों को स्वच्छता के लिए जागरूक किया है तो वही चारों तरफ गंदगी का आलम भी पसरा हुआ है l परिसर में साफ सफाई का ध्यान ना रखना वह जगह-जगह कचरा फैला होना कितना सही है इसका भी अंदाजा लगाया जा सकता हैl जबकि अस्पताल में मरीज स्वस्थ होने के लिए आता है लेकिन गंदगी की दुर्गंध वाले वातावरण और बिना बेडशीट वाले पलंग इलाज होने की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आती है l
गौरतलब है कि अस्पताल में साफ-सफाई और बेड पर साफ चादर होना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि इससे मरीजों को संक्रमण से बचाया जा सकता है। लेकिन यहां इन जरूरी व्यवस्थाओं की अनदेखी की जा रही है।
स्थानीय लोगों और मरीजों ने स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से मांग की है कि अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए और मरीजों को कम से कम बुनियादी सुविधाएं तो उपलब्ध कराई जाएं।
अब देखना यह होगा कि इस लापरवाही पर जिम्मेदार अधिकारी क्या कदम उठाते हैं और मरीजों को कब तक बेहतर सुविधाएं मिल पाती हैं। फिलहाल अस्पताल की यह तस्वीर सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को साफ तौर पर दिखा रही है।
हरिशंकर बेन


