षडयंत्र पूर्वक पद का दुरूप्रयोग कर भ्रष्टाचार करने वाले आरोपीगण को हूई सजा
विशेष लोक अभियोजक श्रीमती हेमलता कुशवाह ने बताया कि आज दिनांक 25/02/2026 माननीय विशेष न्यायालय श्री मनोज कुमार सिंह, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के द्वारा जिला सहकारी एवं ग्रामीण विकास बैंक के अधिकारीगण जिनमे विक्रय अधिकारी हरिहर प्रसाद मिश्रा, आर एस गर्ग, पुष्टीकर्ता अधिकारी, हुकुमचन्द सिंघाई महाप्रबधंक एवं क्रेता श्रीमती भावना पति प्रभात कुमार सिंहा को धारा 420 सहपठित धारा 120-बी भादवि 13-1(डी) सहपठित 13(2) पीसी एक्ट में दोष सिद्ध पाते हुये, विक्रय अधिकारी हरिहर प्रसाद मिश्रा, आर एस गर्ग, पुष्टीकर्ता अधिकारी, हुकुमचन्द सिंघाई महाप्रबधंक एवं क्रेता श्रीमती भावना पति प्रभात सिन्हा को धारा 420 सहपठित धारा 120-बी भादवि मे 03-03 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1,000-1000 अर्थदण्ड (प्रत्येक आरोपी को) एवं आरोपीगण विक्रय अधिकारी हरिहर प्रसाद मिश्रा, आर एस गर्ग, पुष्टीकर्ता अधिकारी, हुकुमचन्द सिंघाई महाप्रबधंक को धारा 13-1(डी) सहपठित 13(2) पीसी एक्ट में प्रत्येक धारा मे 3-3 वर्ष का सश्रम कारावास व 1000-1000 रू अर्थदण्ड-, (प्रत्येक आरोपी को) से दण्डित का निर्णय पारित किया है । उक्त प्रकरण में शासन की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्रीमती हेमलता कुशवाहा द्वारा पैरवी की गई है।
घटना का संक्षिप्त विवरण :-
ग्राम महाबडिया तहसील हुजूर जिला भोपाल के कृषक आदिवासी मोहम्मद फिरोज पिता मोहम्मद इब्राहिम द्वारा अपनी कृषि भूमि 1990 मे बंधक रख 20,000 रू का लोन पंप एवं थृसर के लिये लिया था आरोपीगण द्वारा कृषक की 5 एकड भूमि दिनांक 25/02/2000 को मात्र 70 हजार रूपये मे भावना पति प्रभात सिन्हा को नीलामी प्रकिया का उल्लघंन कर कृषि भूमि बाजार मूल्य एवं कलेक्टर द्वारा निर्धारित मूल्य से अत्याधिक कम मूल्यो पर अवैधानिक रूप से नियम के विरूद्ध नीलामी कार्यवाही कर धोखाधाडी कर अपने पद का दुरूप्रयोग करते हुए नीलामी संबंधित नोटशीट के कूटरचित दस्तावेज तैयार कर पुष्टि हेतु संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थााऐ भोपाल को भेजा गया, जहां उनके द्वारा अवैधानिक रूप से नीलामी की पुष्टि आदेश पारित किया गया। उक्त लिखित सूचना के आधार पर लोकायुक्त पुलिस द्वारा जॉच कर अपराध पंजीबद्ध किया गया विवेचना उपरान्त अभियोग पत्र माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया माननीय न्यायालय द्वारा अभियोजन साक्ष्य, दस्तोवजों, लिखित तर्को से सहमत होते हुये आरोपीगण उक्त धाराओं से दण्डित किया गया।


