रिपोर्टर सीमा कैथवास
नर्मदापुरम। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय शंभूदयाल मिश्रा जिन्होंने महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जिन्होंने महात्मा गांधी के आह्वान पर सिविल जज सागर के पद से इस्तीफा देकर स्वतंत्रता आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई और इस दौरान
वह दो बार जेल में भी रहे। उनकी पैतृक भूमि प्रेमकुटी प्रीतिधाम सदर बाजार पर स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन की बैठके भी होती थी। उक्त वादग्रस्त संपत्ति पर एक ऐतिहासिक मकान भी है जो कि आंदोलन की कई यादों को समेटे हुये है। पंडित श्री मिश्रा का निधन 1958 को हुआ था। जिनके पांच पुत्रों की मृत्यु उपरांत संपत्ति का विधि अनुसार बंटवारा भी नहीं हो सका है। वहीं वादग्रस्त संपत्ति के दुरुपयोग जैसे उक्त गंभीर विषय को लेकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व.श्री मिश्रा के वारसान याचिकाकर्ता आनंद मिश्रा द्वारा शासन प्रशासन को शिकायत करने के उपरांत जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तब अपने अधिवक्ता मनीष कुमार सराठे सहित वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश उपाध्याय सुप्रीम कोर्ट नई दिल्ली के माध्यम से सिविल न्यायालय कनिष्ठ खंड नर्मदापुरम न्यायाधीश मधुबाला सोलंकी की अदालत में सुनवाई हेतु वाद प्रस्तुत किया। जिसे अदालत द्वारा स्वीकार करते हुए 56 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। उक्त विषय को लेकर याचिकाकर्ता आनंद मिश्रा ने अवगत कराया कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय पंडित शंभूदयाल मिश्रा के ऐतिहासिक मकान में वारसानों की बगैर अनुमति व सहमति के बगैर संभागीय जिला क्रिकेट संघ, जिला क्रिकेट संघ तथा यूथ क्रिकेट क्लब का कार्यालय चल रहा है तथा कई व्यावसायिक गतिविधियां भी चल रही है। हरिद्वार से आने के बाद स्वर्गीय श्री मिश्रा के पोते आनंद मिश्रा ने इन गतिविधियों का विरोध किया और पूर्व सचिव एमपीसीए संजीव राव,अध्यक्ष कपिल फौजदार, प्रदीप तोमर सचिव एनडीसीए को फोन कर नाराजगी भी जाहिर की और पैतृक निवास से कार्यालय हटाने के लिए भी कहा। बावजूद भी कार्यालय नहीं हटाया गया। इसी तरह मकान में खिलाड़ियों को ठहराए जाने इत्यादि जैसी गतिविधियों पर भी आपत्ति दर्ज कराई। याचिकाकर्ता ने बताया कि आनंद मिश्रा सहित 8 वारसानो ने प्रथम सिविल न्यायाधीश की अदालत में वाद प्रस्तुत किया है। जिसमें अदालत से मांग की गई है कि अवैध निर्माण तोड़ा जाए, समस्त व्यावसायिक गतिविधियां, क्रिकेट संघों व क्लब कार्यालयों के किराया, लाभ, उपयोग का हिसाब लेकर समस्त वारसानों को ब्याज सहित दिया जावे।


