जहा बेजोड़ मजबूती,सख्त निगरानी, सुरक्षा के लिए अलग ही पहचान और खास संरक्षा और विश्वास की कसौटी पर खरा उतरने वाला रेलवे विभाग भी इन दिनों फर्जीवाड़े में शुमार हो रहा है। लेन देन से लेकर घटिया निर्माण अब आम बात हो चली है। हद तो तब हो जा रही है, जब केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को ही पलीता लगाया जा रहा है l और पश्चिम मध्य रेलवे के कटनी से लेकर जबलपुर तक के अफसर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
हम बात कर रहे हैं,इन दिनो स्टेशनों में चल प्लेटफॉर्म निर्माण कार्य की l जो कटनी बीना रेलवे खंड के बीच रीठी रेलवे स्टेशन में चल रहा है l यहां दो नंबर प्लेटफार्म में प्रमुख रखरखाव प्रबंधन का कार्य जो चल रहा हैl
उसमे ठेकेदार द्वारा घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग कर रेलवे विभाग को चूना लगाने का काम किया जा रहा है l
पूरे प्लेटफार्म में सीमेंट की ईटों और कोटा स्टोन की जुढाई, रेता की जगह डस्ट से की जा रही है l नतीजा यह है कि एक तरफ से प्लेटफॉर्म बनता जा रहा है वहीं दूसरी ओर से उखड़ता भी चला जा रहा है l
जिस प्रकार से प्लेटफार्म बनाया जा रहा है वह ज्यादा दिन नहीं चलेगा। कुछ महीने में खराब हो जाएगा।
उसके बाबजूद भी रेलवे प्लेटफॉर्म निर्माण में ठेकेदारों द्वारा घटिया सामग्री का उपयोग, मानकों की अनदेखी और इन कार्यों में अक्सर जिम्मेदार अधिकारियों की अनुपस्थिति होने पर निर्माण कार्य के लिए अनुचित तरीकों का उपयोग भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाया जा रहा है l जबकि सीमेंट, कंक्रीट और रेत के स्तर में कमी होने पर प्लेटफॉर्म की मजबूती कम हो जाती है। तकनीकी मानकों की अनदेखी सही मोटाई या कंक्रीट की परत का न होना, जिससे फर्श जल्दी टूट जाता है। रेलवे इंजीनियरों की साइट पर गैर-मौजूदगी के कारण ठेकेदार अपनी मनमानी करते हैं।
प्रभाव और परिणाम निर्माण कार्य, जो लंबा चलना चाहिए, वह कुछ ही महीनों में खराब होकर खंडहर बन जाता है। और घटिया निर्माण से यात्रियों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है। जो केंद्र सरकार या रेलवे द्वारा आवंटित राशि का गलत इस्तेमाल कर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है
जिसको लेकर ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि उक्त बनाए जा रहे प्लेटफार्म की जांच कर मजबूती से निर्माण कार्य किया जाए l ताकि शासकीय राशि का सदुपयोग हो सके l
हरिशंकर बेन


