पांढुर्णा /04 फरवरी 2026/ कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ के निर्देशानुसार स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से सौंसर विकासखंड के जामसांवली में मानसिक स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर ग्रामीण आदिवासी समाज विकास संस्थान द्वारा संचालित मानसिक स्वास्थ्य परामर्श केंद्र में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिकों ने भाग लेकर अपनी मानसिक स्वास्थ्य जांच कराई।
शिविर में सेवानिवृत्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एन.के. शास्त्री, विकासखंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. योगेश शुक्ला, संस्थान के संस्थापक श्री श्यामराव धवले, डॉक्टर एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. प्रिया मोहोड़, सचिव डॉ. सुप्रिया नखाते, चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर संस्थान (हनुमान लोक) के सचिव श्री टीकाराम कारोकर सहित शालिनी ताई मेघे अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. अभिजीत फाये, डॉ. सत्यम गुप्ता और श्री प्रफुल्ल वैद्य प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
शिविर के दौरान शालिनी ताई मेघे अस्पताल के विशेषज्ञ मनोचिकित्सकों द्वारा मानसिक रोगों से पीड़ित मरीजों का गहन परीक्षण किया गया तथा संस्थान के माध्यम से उन्हें निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया गया। इस अवसर पर चिकित्सकों ने समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर फैली भ्रांतियों और अंधविश्वास को दूर करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानसिक रोग किसी भी अन्य शारीरिक बीमारी की तरह सामान्य है और समय पर उचित उपचार एवं परामर्श मिलने पर रोगी का पूर्णतः स्वस्थ होना संभव है। साथ ही समाज से यह अपील भी की गई कि मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार किया जाए, क्योंकि यह उपचार प्रक्रिया में दवा जितना ही सहायक सिद्ध होता है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सेवानिवृत्त सीएमएचओ डॉ. एन.के. शास्त्री ने मानसिक स्वास्थ्य उपचार की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में अक्सर लोग मानसिक रोगों को दैवीय प्रकोप या अन्य भ्रांतियों से जोड़ लेते हैं, जबकि आधुनिक चिकित्सा पद्धति में इसका प्रभावी और सटीक इलाज उपलब्ध है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के शिविरों की निरंतरता पर बल देते हुए कहा कि इससे अंतिम छोर तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा सकती हैं।
वहीं ग्रामीण आदिवासी समाज विकास संस्थान के संस्थापक श्री श्यामराव धवले ने अपने संबोधन में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि संस्थान का उद्देश्य केवल उपचार प्रदान करना ही नहीं, बल्कि मानसिक रोग से जुड़े सामाजिक कलंक को समाप्त करना भी है। उन्होंने कहा कि जागरूकता और सामुदायिक सहयोग के माध्यम से ही पीड़ित व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा में पुनः शामिल किया जा सकता है।
*संवाददाता शुभम सहारे पांढुरना*


