कटनी (04 फरवरी) – शासकीय महाविद्यालय विजयराघवगढ़ में विद्यार्थियों को कम लागत तकनीकी जीरो बजट फार्मिंग के तहत जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण प्राचार्या डॉ. सुषमा श्रीवास्तव के मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. अरुण सिंह एवं डॉ. सुमन पुरवार के सहयोग से जैविक कृषि विशेषज्ञ रामसुख दुबे द्वारा जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण में बताया गया कि उगरा, जड़ सड़न, पौध गलन, कंडवा आदि रोगों के नियंत्रण के लिए जैविक फफूंद नाशक दवा ट्राइकोडर्मा विरडी का उपयोग करते हैं। इसका उपयोग विभिन्न रोग कारकों का न केवल नियंत्रण करता है। बल्कि पौधों को अच्छी बढ़वार भी प्रदान करता है। ट्राइकोडर्मा रोग कारक कवक के साथ ही साथ मृदा में उपस्थित सूत्र कृमि को भी नियंत्रित करता है। ट्राइकोडर्मा प्रकृति के वातावरण को बिना दूषित किए और जैव तंत्र को बिना बिगाड़े हुए एक जैव नियंत्रक का कार्य करता है, जो जैविक खेती में पादप रोग नियंत्रण के लिए आवश्यक है। ट्राइकोडर्मा का उपयोग बीज उपचार, भूमि उपचार, नर्सरी उपचार, जड़ एवं कंद उपचार के लिए किया जाता है। ट्राइकोडर्मा का प्रयोग करते समय मृदा में पर्याप्त नमी एवं कार्बनिक पदार्थ होना चाहिए। यह मृदा में रहने वाले लाभदायक सूक्ष्मजीवों की संख्या एवं उनकी क्षमता को बढ़ाता है।


