भोपाल में वेटिंग शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है। सोमवार को शिक्षकों ने अनोखे तरीके से प्रदर्शन करते हुए भर्ती प्रक्रिया में कथित अनदेखी और देरी पर नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिल पाई है, जिससे वे आर्थिक और मानसिक संकट का सामना कर रहे हैं।
भर्ती प्रक्रिया पर सवाल
उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती वर्ग-1 वर्ष 2023 में पहले पात्रता परीक्षा और उसके बाद चयन परीक्षा आयोजित की गई। शिक्षकों का कहना है कि यह परीक्षा करीब 6 वर्षों के अंतराल के बाद कराई गई थी। इससे पहले वर्ष 2018 और उससे पूर्व पात्रता परीक्षा के आधार पर ही नियुक्तियां होती थीं।
वेटिंग शिक्षकों का आरोप है कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार एक ही भर्ती में दो परीक्षाएं ली गईं और अच्छे अंक लाने के बावजूद केवल 2901 अभ्यर्थियों को ही नियुक्ति मिली, जबकि बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं।
पारिवारिक जिम्मेदारियों का दबाव
प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने बताया कि लंबे समय से नियुक्ति न मिलने के कारण कई अभ्यर्थी अपने परिवार का भरण-पोषण तक नहीं कर पा रहे हैं। वे सरकार से शीघ्र समाधान और अतिरिक्त काउंसलिंग की मांग कर रहे हैं।
राजपत्र के अनुसार स्वीकृत पद
वेटिंग शिक्षकों ने राजपत्र का हवाला देते हुए बताया कि वित्त विभाग द्वारा स्वीकृत पदों की संख्या कहीं अधिक है—
स्कूल शिक्षा विभाग: 27 दिसंबर 2024 के अनुसार 48,223 पद
जनजातीय कार्य विभाग: 6 दिसंबर 2024 के अनुसार 10,501 पद
पूर्व शिक्षक भर्तियों का हवाला
शिक्षकों ने पिछली भर्तियों का उदाहरण देते हुए कहा—
वर्ष 2011 में वर्ग-1 के लगभग 11,000 पदों पर भर्ती हुई थी, जिसमें 5–6 बार काउंसलिंग कराई गई।
वर्ष 2018 में वर्ग-1 के लगभग 17,000 पदों पर भर्ती हुई और बाद में 4,000 पद बढ़ाकर दो बार काउंसलिंग कराई गई।
जबकि वर्ष 2023 में वर्ग-1 के कुल 8,720 पदों में से केवल 5,053 पदों को ही सीधी भर्ती में शामिल किया गया।
समाधान की मांग
वेटिंग शिक्षकों ने सरकार से मांग की है कि रिक्त पदों के अनुसार अतिरिक्त काउंसलिंग कराई जाए और योग्य अभ्यर्थियों को जल्द नियुक्ति दी जाए, ताकि वर्षों से चल रही अनिश्चितता समाप्त हो सके।


