इंदौर में एक पत्रकार से हुई कथित बदसलूकी का मामला अब सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं रहा। यह मुद्दा धीरे-धीरे प्रदेशव्यापी बहस का रूप लेता जा रहा है। शनिवार को इसका असर विंध्य अंचल के रीवा में देखने को मिला, जहां छात्र संगठनों ने सड़क पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराया।
शहर के प्रमुख सिरमौर चौराहे पर NSUI के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया। नारेबाजी, पुतला दहन और आक्रोशपूर्ण भाषणों के जरिए छात्रों ने सत्ता में बैठे नेताओं की भाषा और व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े किए।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका सबसे अहम होती है, लेकिन जब सत्ता का शीर्ष पत्रकारों के सवालों से असहज होकर मर्यादा लांघने लगे, तो यह केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था का संकट बन जाता है। छात्रों ने आरोप लगाया कि कैलाश विजयवर्गीय का व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
NSUI नेताओं ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि को आलोचना और सवालों को सहन करने का नैतिक बल होना चाहिए। यदि मंत्री पद पर बैठे व्यक्ति ही भाषा की मर्यादा भूल जाएं, तो युवाओं में गलत संदेश जाता है। इसी आधार पर छात्रों ने मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने की मांग की।
गौरतलब है कि इंदौर में दूषित जल आपूर्ति से जुड़े सवाल पर पत्रकार से हुई तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। बाद में मंत्री की ओर से खेद प्रकट किया गया, लेकिन विपक्षी संगठनों का कहना है कि माफी से पहले की भाषा और रवैया कहीं अधिक चिंता का विषय है।
अब यह मामला सिर्फ एक वीडियो या बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सत्ता, संवेदनशीलता और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को लेकर प्रदेश में नई बहस छेड़ चुका है।
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