मध्य प्रदेश में दूषित पानी पीने से नागरिकों की मौत और सैकड़ों लोगों के बीमार होने की घटनाओं ने शासन-प्रशासन को झकझोर कर रख दिया है। इस गंभीर लापरवाही पर डॉ. मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों को साफ चेतावनी दी है कि जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ अब किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री की नाराजगी के तुरंत बाद प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आया। नए साल के पहले ही दिन प्रदेश के अनुराग जैन ने मंत्रालय में उच्चस्तरीय आपात बैठक बुलाकर सभी विभागों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए।
गलतियों पर जीरो टॉलरेंस का संदेश
मुख्य सचिव ने इंदौर की घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोहराई गईं तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई तय है। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी आपदा या स्वास्थ्य संकट की स्थिति में विभागों को बिना देरी राहत, इलाज और जांच कार्य शुरू करना होगा। साथ ही, घटनाओं के वैज्ञानिक विश्लेषण कर स्थायी समाधान सुनिश्चित किए जाएंगे।
2047 तक की तैयारी, सिस्टम में बड़े बदलाव की कवायद
बैठक में शासन की दीर्घकालीन रणनीति पर भी मंथन हुआ। मुख्य सचिव ने कहा कि ‘विजन 2047’ के तहत दशकों पुराने कानूनों और नियमों की समीक्षा कर उन्हें सरल और आधुनिक बनाया जाएगा, ताकि आम नागरिक और व्यापारी अनावश्यक प्रक्रियाओं से मुक्त हो सकें।
बजट, योजनाएं और तकनीक पर फोकस
शासन स्तर पर यह भी तय किया गया कि 2028 तक ‘रोलिंग बजट’ व्यवस्था को अपनाया जाएगा, जिसमें गरीब, किसान, महिला और युवाओं को केंद्र में रखा जाएगा। बड़े प्रोजेक्ट्स की नियमित निगरानी, एमपी ई-सेवा ऐप का विस्तार, सोलर एनर्जी को बढ़ावा और सिंचाई क्षमता में इजाफा जैसे मुद्दों पर विभागों को स्पष्ट लक्ष्य सौंपे गए।
साफ संदेश: लापरवाही नहीं, जवाबदेही होगी तय
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि मध्य प्रदेश में अब जनहित से जुड़ी किसी भी चूक पर सख्ती तय है। सरकार ने प्रशासन को संकेत दे दिया है कि काम में ढिलाई नहीं, परिणाम चाहिए।
अगर चाहें तो मैं इसे


