छिन्दवाड़ा कलेक्टर श्री हरेंद्र नारायन एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री अग्रिम कुमार के निर्देशन में 17 दिसंबर 2025 से जिला छिंदवाड़ा/पांढुर्णा में “दुग्ध समृध्दि सम्पर्क अभियान” का द्वितीय चरण प्रारंभ हो गया है एवं प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा दिये निर्देशानुसार उप संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग डॉ.एच.जी.एस.पक्षवार द्वारा आज विकासखण्ड चौरई के ग्राम कौआखेडा के पशुपालक श्री रोशन तेजलाल, विकासखण्ड परासिया के ग्राम परासिया गौली के पशुपालक श्री राजेश उइके व श्री खूबचंद डेहरिया, विकासखण्ड तामिया के ग्राम बिजोरी के पशुपालक श्री तिरुलाल कवरेती, विकासखण्ड छिंदवाडा के ग्राम शहपुरा के पशुपालक श्री रेवाराम पाल व ग्राम सांख के पशुपालक श्री दयाराम चौरे व श्री भूरमल चौरिया एवं विकासखण्ड मोहखेड के ग्राम अर्जुनवाडी के पशुपालक श्री सालिकराम माहोरे व श्रीमती मीना बकोरिया का सत्यापन किया गया । सत्यापन में पशुपालकों से ग्राम में भ्रमण कर रहे सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों, मैत्री कार्यकर्ता द्वारा तीन मुख्य स्तंभों नस्ल सुधार, पशु पोषण, पशु स्वास्थ्य के संबंध में क्या-क्या बातें बताई गई, उन्हें रील मोबाइल में दी गई कि नहीं का सत्यापन किया गया ।
उप संचालक डॉ.पक्षवार द्वारा विकासखण्ड छिंदवाडा के ग्राम शहपुरा में सत्यापन के दौरान पशुपालकों को अनुकरणीय हितग्राही श्रीमती सुषमा शर्मा, विकासखण्ड परासिया के ग्राम जाटाछापर के बारे में बताया कि एक महिला पशुपालक जिनके पास 30 गायों से घी बनाकर 2000 रूपये प्रति किलो बेचा जा रहा है । प्रभारी मंत्री जी द्वारा श्रीमती सुषमा शर्मा से 10000 रूपये का घी क्रय किया गया है। विगत दिनों छिंदवाडा की थोक सब्जी मण्डी में जैविक उत्पाद से उत्पन्न सब्जियों एवं दुग्ध उत्पाद करने वाले किसानों का मेला लगाया गया ,था जिसमें श्रीमती सुषमा शर्मा द्वारा स्टाल लगाकर 12000 रूपये का घी विक्रय किया गया । श्रीमती सुषमा शर्मा द्वारा यह बताया गया कि उनके द्वारा अभी तक 60 किलो घी बेचा जा चुका है, जिससे उन्हें 1,20,000 रूपये प्राप्त हुए हैं । जब एक महिला पशुपालक गौपालन कर लाभ प्राप्त कर सकती हैं, तो अन्य पशुपालक भी कर सकते हैं।
उप संचालक डॉ.पक्षवार द्वारा बताया गया कि अभियान का प्रमुख उद्देश्य दुग्ध उत्पादन में गुणात्मक सुधार लाने के लिये पशुपालकों से गृह भेंट कर उनको तीन मुख्य स्तंभों नस्ल सुधार, पशु पोषण एवं पशु स्वास्थ्य पर व्यापक रूप से जागरूक करना है। पशु स्वास्थ्य में सभी प्रकार के टीकाकरण कार्य, पशु पोषण में क्रमि नाशक औषधी देकर पशु के पेट में जो क्रमि है उन्हें नष्ट किया जाना, साथ ही हरा चारा जैसे नेपियर घास, साइलेज, ज्वार, मक्का, चरी, बरसीम, लूर्सन आदि खिलाने पर दुधारू पशुओं के दूध में बढ़ोतरी होगी । नस्ल सुधार कार्यक्रम के अंतर्गत दोनों जिलों छिंदवाड़ा/पांढुर्णा में सेक्स्ड सॉर्टेड सीमन उपलब्ध हैं। पशुपालकों से अनुरोध है कि जब उनका मादा पशु गर्मी में आता है तो सेक्स्ड सॉर्टेड सीमन से ही नस्लवार कृत्रिम गर्भाधान कार्य करायें, जिससे 90 प्रतिशत मादा वत्स उत्पन्न होते हैं, इससे नस्ल सुधार भी होगा एवं दूध उत्पादन में भी वृध्दि होगी एवं पशुपालकों को लाभ प्राप्त होगा ।
*संवाददाता शुभम सहारे छिंदवाड़ा*


