छिन्दवाड़ा मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्व-रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में जिले की जनपद पंचायत तामिया की श्रीमती श्वेता धुर्वे ने आजीविका मिशन से जुड़कर न केवल स्वयं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया, बल्कि अपने परिवार को भी स्थायी आजीविका का मजबूत आधार प्रदान किया है। श्वेता धुर्वे की यह सफलता कहानी ग्रामीण अंचल की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है।
शिक्षा और समूह से जुड़ाव – श्रीमती धुर्वे स्नातक शिक्षित हैं तथा वर्ष 2017 में दुर्गा स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत, बैठक सहभागिता और प्रशिक्षण के माध्यम से आजीविका गतिविधियों को समझा और आगे बढ़ने की योजना बनाई। वर्तमान में वे समूह सचिव के रूप में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
स्व-रोजगार की शुरुआत- वर्ष 2018 में समूह की बचत से 10 हजार रुपये का ऋण प्राप्त कर श्रीमती धुर्वे ने सिलाई मशीन खरीदी और ग्राम स्तर पर सिलाई कार्य प्रारंभ किया। इससे उन्हें प्रारंभिक रूप से नियमित आय प्राप्त होने लगी और स्व-रोजगार की दिशा में पहला कदम सफलतापूर्वक स्थापित हुआ।
किराना दुकान से बढ़ा व्यवसाय- वर्ष 2019 में दुर्गा स्व-सहायता समूह द्वारा मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक, देलाखारी से प्राप्त ऋण में से समूह की सहमति से श्वेता धुर्वे को किराना दुकान संचालन हेतु 30 हजार रुपये की राशि प्रदान की गई। उन्होंने समय पर ऋण चुकाकर अपनी वित्तीय अनुशासन और प्रबंधन क्षमता का परिचय दिया।
फोटो कॉपी एवं आटा चक्की से आय में वृद्धि- किराना दुकान की सफलता के बाद श्रीमती धुर्वे ने पुनः समूह से 15 हजार रुपये का ऋण लेकर फोटो कॉपी मशीन एवं फोटो स्टूडियो प्रारंभ किया, जिससे लगभग 8 हजार रुपये मासिक आय होने लगी। इसके पश्चात प्रधानमंत्री ग्रामीण पथ विक्रेता योजना से 10 हजार रुपये का ऋण तथा स्वयं की बचत से आटा चक्की स्थापित की गई। वर्तमान में इन सभी आजीविका गतिविधियों से उन्हें प्रतिमाह लगभग 25 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है।
परिवार एवं समाज में सकारात्मक परिवर्तन- आज श्रीमती धुर्वे के साथ उनके पति भी सभी कार्यों में सहयोग कर रहे हैं और परिवार पूरी तरह स्व-रोजगार पर आधारित हो चुका है। वे दुर्गा महिला ग्राम संगठन मरकाढाना एवं नारी एकता आजीविका सीएलएफ देलाखारी से सक्रिय रूप से जुड़कर अन्य महिलाओं को भी आजीविका से जोड़ने का कार्य कर रही हैं।
श्रीमती धुर्वे की यह सफलता कहानी दर्शाती है कि मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता, सामाजिक सम्मान और नेतृत्व के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। शासन की लाड़ली बहना योजना सहित विभिन्न योजनाओं के लाभ से आज श्वेता धुर्वे अपने बच्चों को बेहतर भविष्य प्रदान कर पा रही हैं और क्षेत्र की महिलाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं।
*संवाददाता शुभम सहारे छिंदवाड़ा*


