कटनी – मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कटनी के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री जितेन्द्र कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में जिला न्यायालय एवं तहसील न्यायालयों सहित अन्य विभागों में शनिवार 13 दिसम्बर को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया।
नेशनल लोक अदालत के अंतर्गत आपसी समझौते से कुटुम्ब न्यायालय कटनी में पारिवारिक राजीनामा किया गया। कुटुम्ब न्यायालय कटनी में आवेदिका ने अपने पति से अलग रहकर भरण पोषण के लिए परिवार न्यायालय, कटनी में धारा 125 दंप्रसं के अंतर्गत प्रकरण दायर किया था, क्योंकि पति द्वारा लंबे समय से कोई आर्थिक सहायता नहीं दी जा रही थी। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण आवेदिका स्वयं एवं अपने भरण पोषण का प्रबंध करने में असमर्थ थी, अतः न्यायालय की शरण लेना उसकी मजबूरी बन गई। न्यायालय एवं कानूनी सहायता की भूमिका कार्यवाही के दौरान न्यायालय द्वारा दोनों पक्षों को परामर्श एवं समझाइश दी गई, जिससे प्रतिवादी पति को अपनी वैधानिक जिम्मेदारी का बोध कराया गया। न्यायालय और कानूनी सेवाओं की सक्रिय पहल से विवाद को लम्बी मुकदमेबाज़ी की दिशा में बढ़ने के बजाय आपसी सहमति से सुलह की ओर मोड़ा गया।
लोक आदलत की कार्यवाही के दौरान विस्तृत तरीके से उभयपक्ष के मध्य मैत्रीभाव व सामंजस्य कराया गया। उभयपक्ष आपसी सभी मतभेदों को भुलाकर सुखपूर्वक एक साथ दांपत्य जीवन निर्वहन के लिये तैयार होकर, एक-दूसरे को यह आश्वासन दिलाया है कि भविष्य में वे एक-दूसरे के प्रति किसी प्रकार का अप्रिय व्यवहार नहीं करेंगे और आपस में सामंजस्य बनाकर एक साथ सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करेंगे। इस प्रकार समझाईश पश्चात उभयपक्ष एक साथ निवास करने को तत्पर हो गये तथा इस याचिका को राजीनामा के आधार पर समाप्त करा लिया है।
इसी प्रकार नेशनल लोक अदालत में आपसी समझौते से कुटुम्ब न्यायालय कटनी में पारिवारिक राजीनामा किया गया। आवेदिका पूजा गौतम के द्वारा सन 2016 में पति विनय गौतम के विरुद्ध घरेलू हिंसा का आवेदन प्रस्तुत किया गया था एवं 2024 में पति के विरुद्ध भरण-पोषण का आवेदन प्रस्तुत किया गया। एक अन्य मामला सन 2024 में भरण-पोषण की राशि बढ़ाए जाने के संबंध में पेश किया गया था। इन तीनों मामलों में उभयपक्ष के मध्य न्यायालय द्वारा समझौते की कार्यवाही की गई। दोनों उभयपक्षों को सुना गया। इस सम्पूर्ण कार्यवाही में आवेदिका एवं अनावेदक के परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। उभयपक्ष के अधिवक्ता एवं न्यायालय के द्वारा अथक परिश्रम के बाद उभयपक्ष के मध्य सहमति बनी और उभयपक्ष समझौते के लिए आगे बढ़े। सम्पूर्ण तुष्टि में आवेदिका को अनावेदक की ओर से तीन लाख रुपये नगद प्रदान किए गए।


