जबलपुर। मध्य प्रदेश विधानसभा में उत्तर मध्य से विधायक अभिलाष पांडे ने बच्चों में बढ़ती मोबाइल और इंटरनेट की लत को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने इसे केवल पारिवारिक नहीं, बल्कि आने वाले समय में देश की एक बड़ी सामाजिक और मानसिक चुनौती करार दिया।
विधायक ने सदन में कहा कि 14 से 18 वर्ष के किशोरों में डिजिटल एडिक्शन खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है। बच्चे अब बिना मोबाइल देखे खाना तक नहीं खाते, यह स्थिति भविष्य के लिए बेहद चिंताजनक संकेत है।
उन्होंने बताया कि लगातार रील, गेम और तेज़ विजुअल कंटेंट देखने से बच्चों के मस्तिष्क में डोपामिन का असंतुलन पैदा हो रहा है, जिससे वे तात्कालिक आनंद के आदी बनते जा रहे हैं और वास्तविक जीवन से कटते चले जा रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एल्गोरिद्म बच्चों को वही कंटेंट बार-बार दिखा रहा है, जिससे यह लत और गहरी होती जा रही है।
बच्चों की आंखों पर बढ़ता खतरा
विधायक ने एम्स की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि बच्चों में मायोपिया की समस्या तेजी से बढ़ रही है। पहले जहां यह बीमारी युवावस्था में होती थी, वहीं अब 10–12 साल के बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि देश में 87 प्रतिशत लोग डिजिटल गैजेट का उपयोग कर रहे हैं और 10–14 वर्ष आयु वर्ग के 83 प्रतिशत बच्चे नियमित रूप से मोबाइल चला रहे हैं, जो वैश्विक औसत से कहीं अधिक है।
खेल का मैदान सूना, कमरे में सिमटा बचपन
अभिलाष पांडे ने चिंता जताई कि बच्चे अब मैदानों से गायब हो रहे हैं। शारीरिक गतिविधि के अभाव के कारण उनमें चिड़चिड़ापन, तनाव, अकेलापन और अवसाद जैसी मानसिक समस्याएं बढ़ रही हैं। पारिवारिक संवाद भी लगातार कमजोर हो रहा है।
उन्होंने संयुक्त परिवार और पारिवारिक संवाद को इन समस्याओं का प्रभावी समाधान बताया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के “कुटुंब प्रबोधन” जैसे सामाजिक प्रयासों की सराहना की।
विधायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि परिवारों में “नो गैजेट जोन” की अवधारणा अपनाई जानी चाहिए। उन्होंने एक सजीव उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने ट्रेन में देखा कि एक छोटे बच्चे को खाना खिलाने के लिए पूरा परिवार जुटा था, लेकिन बच्चा केवल मोबाइल देखने पर ही भोजन कर रहा था।
प्रदेश स्तर पर नीति बनाने की मांग
भाजपा विधायक ने सुझाव दिया कि स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग मिलकर इस गंभीर समस्या पर ठोस नीति बनाएं। उन्होंने गाजियाबाद में बच्चों के मोबाइल उपयोग को लेकर जारी की गई एडवाइजरी का उदाहरण देते हुए मध्य प्रदेश में भी सख्त दिशा-निर्देश लागू करने की मांग की।
उन्होंने सरकार से अपील की कि प्रदेश भर में मोबाइल एडिक्शन के खिलाफ व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए और आवश्यकता पड़ने पर इसके लिए कानून भी बनाया जाए, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जा सके। मीडिया सूत्र



