भोपाल | 5 दिसंबर
मध्यप्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने सदन में 13,476 करोड़ रुपये का द्वितीय अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया। इस बजट में सरकार ने ग्रामीण विकास, आवास, किसानों और महिलाओं से जुड़ी योजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। सरकार का दावा है कि यह बजट “समावेशी विकास” की दिशा में बड़ा कदम है, जबकि विपक्ष ने इसे “कर्ज आधारित अर्थव्यवस्था” करार दिया है।
ग्रामीण आवास को सबसे बड़ा समर्थन
सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लिए 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस राशि से अगले तीन वर्षों में लगभग 12 लाख ग्रामीण परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का कहना है कि यह योजना गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के जीवन स्तर में ऐतिहासिक बदलाव लाएगी।
लाड़ली बहना योजना को मजबूती
बजट में लाड़ली बहना योजना के लिए 18,669 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसके अंतर्गत प्रदेश की 1.26 करोड़ महिलाओं को हर माह 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी। साथ ही कामकाजी महिलाओं के लिए प्रमुख शहरों में महिला छात्रावास व हॉस्टल बनाए जाने की भी घोषणा की गई है।
किसानों के लिए उपार्जन और भावांतर पर फोकस
कृषि क्षेत्र को राहत देने के लिए सरकार ने:
- 2,500 करोड़ रुपये भावांतर भुगतान योजना के लिए
- 1,000 करोड़ रुपये गेहूं-चावल उपार्जन के लिए
प्रावधान किए हैं। सरकार ने संकेत दिए हैं कि आगे चलकर अन्य फसलों को भी भावांतर योजना में जोड़ा जा सकता है।
अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएँ
- जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिए विशेष अभियान
- ग्रामीण यातायात और सड़कों के लिए अलग बजट
- छात्रावास, छात्रा साइकिल योजना और शिक्षा सुविधाओं का विस्तार
मुख्यमंत्री का पलटवार: “कर्ज से विकास का रास्ता चुना है”
विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि —
“सरकार जिम्मेदारी के साथ कर्ज लेकर विकास कर रही है। ब्याज और ऋण की अदायगी समय पर की जा रही है। विकास कार्यों में किसी क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा। विपक्ष आलोचना करे, लेकिन जनता हमारे काम को स्वीकार कर रही है।”
विपक्ष का आरोप: “यह विकास नहीं, कर्ज का विस्तार है”
कांग्रेस ने अनुपूरक बजट को ‘कर्ज बढ़ाने वाला बजट’ बताते हुए सरकार पर हमला बोला। उनका कहना है कि योजनाओं की घोषणाएँ तो बड़ी हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर किसानों को भुगतान में देरी और बेरोजगारी जैसी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
राजनीतिक संकेत भी साफ
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बजट ग्रामीण मतदाता, किसान और महिला वर्ग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। आने वाले वर्षों में इसका सीधा असर पंचायत, निकाय और 2028 विधानसभा चुनावों पर देखने को मिल सकता है।


