सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रीठी में एलटीटी ऑपरेशन शिविर के दौरान महिलाओं के लिए उस समय बेहद शर्मनाक स्थिति बनी जब ऑपरेशन के बाद उन्हें अस्पताल के पुरुष कर्मचारियों द्वारा स्ट्रेचर के बजाए गोद में उठाकर वार्ड तक ले जाया गया। वार्ड में भी महिलाओं को बेड नसीब नहीं हो सके। उन्हें दरी और गद्दे पर ही लिटा दिया गया।
अस्पताल में पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं होने के कारण हाल यह था कि ऑपरेशन के बाद महिलाओं को जमीन पर ऐसे लिटा दिया गया था जैसे उनकी कोई पूछ परख ही नहीं हो। ऑपरेशन के दौरान न तो गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है और न ही वर्ष 2014 में बिलासपुर में एक नसबंदी शिविर में 83 ऑपरेशन किए गए थे, जिनमें से 13 महिलाओं की मृत्यु हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से बीमार हो गईं थी।उसके बाद भी ऑपरेशन के लिए तय किए गए प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जा रहा l
गौरतलब है कि रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नसबंदी ऑपरेशन शिविर का आयोजन किया गया था। यहां पहले से ही पर्याप्त स्थान नहीं है। इसके बाद भी एक ही दिन मैं 50 से अधिक महिलाओं की नसबंदी कर दी। सबसे शर्मनाक बात रह रही की ऑपरेशन के बाद अस्पताल में तैनात पुरुष कर्मचारियों द्वारा महिलाओं को गोद में उठाकर वार्ड तक ले जाया जा रहा था।
कुछ महिलाओं को तो बेड की जगह अस्पताल के फर्श पर दरी और गद्दे बिछाकर लाइन से लिटा दिया गया था। स्वास्थ्य विभाग की ओर से समुचित व्यवस्थाएं नहीं किए जाने से महिलाओं के साथ आए परिजनों को भी काफी समस्याओं का समाना करना पड़ा। गौरतलब है कि अस्पताल महज 30 बिस्तरों का है। जिसमें 10 बेड एनआरसी के हैं। 10 डिलीवरी के रूप में हैं और 10 बेड मेडिकल वार्ड में हैं।
बिलासपुर नसबंदी कांड के बाद 15 बिंदु प्रोटोकॉल के लिए तय किए गए थे। इसी के अनुसार नसबंदी ऑपरेशन शिविरों के आयोजन को लेकर गाइडलाइन जारी की गई थी। इसके अनुसार एक मेडिकल टीम एक दिन में 30 से अधिक नसबंदी ऑपरेशन नहीं कर सकती है
गाइडलाइन के अनुसार ब्लॉक स्तर पर आयेाजित होने वाले शिविरों के लिए जिला स्वास्थ्य अधिकारी जो परिवार कल्याण शिविरों का नोडल अधिकारी भी होता है को मॉनीटरिंग करनी चाहिए। ऑपरेशन थियेटर की एंटी सेप्टिक और एंटी बैक्टीरियल क्लीनिंग होनी चाहिए। पूरा ओटी रूम स्टारलाइज होना चाहिए। जिसमें चिकित्सक दल के अलावा किसी को भी प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए।
ऑपरेशन के कुछ ही घंटों बाद महिलाओं को छुट्टी
ऑपरेशन के बाद जिस महिला का ऑपरेशन हुआ है उसका स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा 10 दिन में तीन बार फॉलोअप लेना चाहिए, जबकि यहां जहां डॉक्टरों की टीम द्वारा निर्धारित से अधिक ऑपरेशन किए गए वहीं दूसरी ओर ऑपरेशन के कुछ ही घंटों बाद महिलाओं को छुट्टी दे दी जाती है ।
वही आशा कार्यकर्ताओं एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को घर जाने की जल्दी में ऑपरेशन वाली महिलाओं को स्ट्रक्चर ना मिलने पर गोद में ही उठाकर ऑटो व गाड़ी तक या पैदल चला कर ही ले जाया जाता है ।
उन्हें यह भी डर नहीं लगता कि महिला पूरी तरह से अभी होश में नहीं आई है ।
लापरवाही की पराकाष्ठा को पार करता हुआ रीठी स्वास्थ्य केंद्र में न जाने कब सुधार होगा,,,l
हरिशंकर बेन


