यह सुशासन नहीं, कुशासन की पराकाष्ठा है।
मध्यप्रदेश में किसान अगर खाद माँगे, तो प्रशासन थप्पड़ बरसाता है!
क्या प्रदेश में अब खाद माँगना गुनाह हो गया है?
पहले भी एक महिला अधिकारी ने किसान को खाद के लिए थप्पड़ मारा था,
और आज फिर—छतरपुर में महिला नायब तहसीलदार ने खाद के लिए लाइन में खड़ी एक छात्रा को सिर्फ टोकन माँगने पर थप्पड़ जड़ दिया।
भूखे प्यासे, दो-दो महीने से खाद के लिए तरसते किसान,
रातों रात लाइन में लगने वाली गरीब महिलाएँ,
छात्राएँ, जिनके सपने किताबों में थे अब सरकारी थप्पड़ों में बदल दिए गए।
और भाजपा सरकार कहती है—“सबका साथ, सबका विकास”
कितना बड़ा मज़ाक है! चुनावी मंचों से किसान सम्मान की बातें,
लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त यह कि किसानों को खाद की जगह थप्पड़ मिलता है।
मुख्यमंत्री जी से अनुरोध है कि इस घटना पर तत्काल संज्ञान लेते हुए
ऐसे अधिकारी के खिलाफ तुरंत और सख़्त से सख़्त कार्रवाई की जाए।
https://x.com/UmangSinghar/status/1996151008494547357?t=plKoY0vu3HoQOzxq9-nzTg&s=19
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