सरकारी व्यवस्था को जनता की सेवा के लिए बनाया गया है लेकिन आज हालात यह हैं कि कई विभागों में कर्मचारियों के बीच पैसों की भूख इस कदर बढ़ चुकी है कि मूलभूत सेवाएँ भी बिना ‘खर्चा पानी’ के मुश्किल हो गई हैं।
आज की इस स्पेशल रिपोर्ट में हम बात करेंगे सरकारी तंत्र मैं जानता के बीच हावी अफसरशाही और बढ़ती पैसों की भूख के बारे में।
,,,पैसे की चाह तो हर इंसान के अंदर होती है, चाहे वह किसी भी पेशे में हो। असल समस्या पैसा कमाने की इच्छा नहीं है, बल्कि गलत तरीके से कमाने की प्रवृत्ति है। फर्क बस इतना है कि किसी को अवसर कम मिलते हैं और किसी को ज़्यादा।
सरकारी अफसरों के बारे में यह धारणा इसलिए ज़्यादा बन जाती है क्योंकि उनके पास फाइलें, मंज़ूरियां, लाइसेंस, परमिशन और पब्लिक सिस्टम का अधिकार होता है। यह अधिकार स्वभाविक रूप से उन्हें कई ऐसे मौके देता है जहाँ अनैतिक कमाई की गुंजाइश पैदा होती है। और सबसे ज्यादा शर्मनाक बात तब होती है ,जब हजारों रुपए महीना की सैलरी पाने वाला कर्मचारी 100 रुपए लिए एक गरीब आदमी को तक नही छोड़ता ।
सबसे सम्मान के योग्य वे कर्मचारी होते हैं जिन्हें बेईमानी करने का पूरा अवसर मिला,l पर उन्होंने अपने सिद्धांतों पर रहते हुए ईमानदारी चुनी। ऐसे लोग ही किसी भी व्यवस्था की रीढ़ होते हैं; चाहे वे सरकारी नौकरी में हों या किसी भी अन्य काम में। लेकिन वह राजनीति के चलते एक जगह-ज्यादा दिन तक टिक नहीं पाते है l
यह हालत कटनी जिले के रीठी तहसील की नही बल्कि सभी जगहो की है । जहा सरकारी विभागों में व्याप्त अवैध वसूली और इसके कारण आम लोगों तक से लेकर विभाग से जुड़े कर्मचारियों तक की बढ़ती परेशानियों की। चाहे वह शिक्षा विभाग हो,जनपद पंचायत हो,राजस्व विभाग हो,पुलिस थाना हो, वन क्षेत्र परिसर हो, महिला बाल विकास विभाग हो, परिवहन विभाग हो या फिर स्वास्थ्य विभाग हो,या फिर छात्रों के रहने की जगह छात्रावास हो आदि सभी विभागों मैं भ्रष्टाचारी एवं अधिकारियों और कर्मचारियों मैं जो पेसो की भूख है वह बढ़ती जा रही है ।
जबकि सरकार लगातार दावा करती है कि भ्रष्टाचार पर सख्ती की जा रही है। जिसके लिए हेल्पलाइन नंबर, शिकायत केंद्र,जनसुनवाई आदि सभी मौजूद हैं।लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसे कई शिकायते है जो आज भी धूल खा रही है । जिससे अधिकारी कर्मचारी भी बेखौफ होकर जनता की मजबूरी का खूब फायदा उठाते हैं l कुछ जगहों पर ईमानदार अधिकारियों की पहल से बदलाव भी नजर आता है l एक कहावत सुनी तो जरूर होगी की इमानदारो के लिए कही कोई जगह नहीं होती, और राजनीति के चलते उनका ट्रांसफर कर दिया जाता हैं l भ्रष्टाचार केवल एक विभाग की समस्या नहीं है l यह हमारी मानसिकता की समस्या है। जब तक सिस्टम में बैठे भ्रष्ट कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी,या हम उनको उनकी जिम्मेदारियां का एहसास करते हुए रिश्वत देना बंद न कर दे । तब तक जनता की जेब से निकलता अनचाहा पैसा रुकने वाला नहीं।
हरिशंकर बेन,,


