भोपाल। मध्यप्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी योजना को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता कमलनाथ ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स (ट्विटर) अकाउंट से जारी बयान में कहा कि सरकार हजारों करोड़ रुपये खर्च करने का दावा करती है, इसके बावजूद प्रदेश में केवल 30 प्रतिशत बेटियाँ ही कक्षा 12वीं तक पहुँच पा रही हैं, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है।
कमलनाथ ने लिखा कि सरकार बीते 17 वर्षों से इस योजना को बड़ी सफलता के रूप में प्रचारित करती रही है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल उलट है। करोड़ों रजिस्ट्रेशन, हर साल बढ़ता बजट और बड़ी-बड़ी घोषणाओं के बावजूद बेटियों की शिक्षा में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने योजना का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ और वोट बैंक तैयार करने के लिए किया, जबकि बेटियों की वास्तविक शिक्षा और सशक्तिकरण पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। कमलनाथ ने कहा कि अगर सरकार सच में संवेदनशील होती तो वह स्कूलों की गुणवत्ता सुधारती, शिक्षकों की कमी दूर करती, बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करती और व्यापक जागरूकता अभियान चलाती।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार ने प्रचार में तो बेटियों की तस्वीरों का खूब इस्तेमाल किया, लेकिन ज़मीन पर शिक्षा सुधार के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार चुनावी मोड से कभी बाहर ही नहीं आई और बेटियों को भविष्य का नागरिक नहीं, बल्कि वोट बैंक के रूप में देखा।
कमलनाथ ने अपने बयान में यह भी जोड़ा कि यदि सरकार की नीयत सच में शिक्षा सुधार की होती तो आज सिर्फ 30 प्रतिशत नहीं, बल्कि अधिकांश बेटियाँ 12वीं तक पढ़ाई पूरी कर रही होतीं। उन्होंने कहा कि जागरूक और शिक्षित बेटी सवाल पूछती है, शायद इसी वजह से सरकार ने सशक्तिकरण की सही दिशा में कदम नहीं बढ़ाए।
अंत में उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की बेटियों को सिर्फ योजनाओं के वादों की नहीं, बल्कि वास्तविक अवसरों, अच्छी शिक्षा, सुरक्षित माहौल और बेहतर भविष्य की जरूरत है।


