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*भारतीय बौद्ध महासभा द्वारा 76 वें संविधान दिवस समारोह का किया आयोजन* *भारतीय संविधान के आदर्शो को अपने जीवन में उतारना* *सच्ची राष्ट्र सेवा -पूर्व राज्यपाल सु़श्री उइके*

by Manish Gautam Chiefeditor
November 26, 2025
in छिन्दवाडा
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*भारतीय बौद्ध महासभा द्वारा 76 वें संविधान दिवस समारोह का किया आयोजन*   *भारतीय संविधान के आदर्शो को अपने जीवन में उतारना*  *सच्ची राष्ट्र सेवा -पूर्व राज्यपाल सु़श्री उइके*
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*भारत का संविधान विश्व के संविधानों,सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों ,ग्रंथों*


समारोह स्थानीय डॉ. भीमराव आम्बेडकर तिराहा, छिंदवाड़ा में भारतीय बौद्ध महासभा द्वारा आयोजित किया गया, जिसका संचालन जिलाध्यक्ष एड. राजेश सांगोडे ने किया। डॉ. आम्बेडकर की प्रतिमा और तथागत भगवान बुद्ध के चित्र पर पूर्व राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके, कार्यक्रम अध्यक्ष एड. रमेश लोखंडे और अन्य सामाजिक व संगठनात्मक पदाधिकारियों ने माल्यार्पण किया।पंचशील ध्वजारोहण, सामूहिक बुद्ध वंदना और भारतीय संविधान की प्रस्तावना की शपथ दिलाई गई, जिसमें शपथ पूर्व राज्यपाल अनुसुईया उइके द्वारा कराई गई।मुख्य अतिथियों के प्रमुख विचारपूर्व राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने कहा कि संविधान दिवस राष्ट्र के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है, भारतीय संविधान केवल विधिक दस्तावेज नहीं बल्कि जीवन का मार्गदर्शक है, जो मौलिक अधिकारों के माध्यम से स्वतंत्रता, समानता और न्याय की गारंटी देता है और मौलिक कर्तव्यों से नागरिकों को जिम्मेदार बनाता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा, अनुशासन, सामाजिक दायित्व और मताधिकार के सही उपयोग के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में भाग लें और डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर के संदेश “हाथों में किताब” के आदर्श को अपनाते हुए शिक्षा में आगे बढ़ें।भारतीय संविधान पर विचारकार्यक्रम अध्यक्ष एवं प्रदेश उपाध्यक्ष एड. रमेश लोखंडे ने बताया कि डॉ. आम्बेडकर के नेतृत्व में लगभग ढाई वर्ष में संविधान मसौदा तैयार हुआ, 26 नवंबर 1949 को इसे अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 से लागू होने पर भारत लोकतांत्रिक गणराज्य बना।उन्होंने कहा कि भारत का संविधान विश्व के सबसे बड़े लिखित संविधानों में है, जो सभी धर्मों, जाति एवं वर्गों के लोगों को समान दृष्टि से देखता है, “एक व्यक्ति एक वोट” के सिद्धांत से लोकतंत्र को मजबूत करता है, और युवाओं को अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति जागरूक होना जरूरी है।लोकतंत्र, बौद्ध विचार और संविधान साहित्यकार एस.आर. शेंडे ने स्पष्ट किया कि बाबा साहब आम्बेडकर द्वारा निर्मित संविधान तथागत गौतम बुद्ध के आदर्शों – समानता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय – पर आधारित है तथा संविधान व लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट संघर्ष की आवश्यकता है। एड. देवेंद्र वर्मा ने कहा कि नागरिकों की अधिकांश समस्याओं का समाधान संविधान की प्रस्तावना, विभिन्न अनुच्छेदों और अनुसूचियों में निहित है, और विधायिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका के माध्यम से कानून व्यवस्था संचालित होती है, इसलिए भारतीय संविधान को राष्ट्र का सर्वोच्च ग्रंथ माना जाना चाहिए।युवाओं और समाज के लिए संदेशएड. विजय मेंढे ने डॉ. आम्बेडकर के सूत्र “शिक्षित बनो, संगठित रहो एवं संघर्ष करो” को आत्मसात करने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि शिक्षा और संगठन से ही संविधान मजबूत होगा और सामाजिक न्याय संभव है।वक्ताओं ने चेतावनी दी कि संविधान को कमजोर करने और डॉ. आम्बेडकर के विचारों को नष्ट करने की कोशिशें होती रहती हैं, इसलिए सामाजिक सौहार्द बनाए रखते हुए बुद्ध और आम्बेडकर के विचारों पर चलकर अंतरराष्ट्रीय शांति और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना सबकी जिम्मेदारी है।

*संवाददाता शुभम सहारे छिंदवाड़ा*

Manish Gautam Chiefeditor

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*शासकीय सेवकों के सामाजिक दायित्व एवं मानवता के प्रति समर्पण का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कलेक्टर कार्यालय छिंदवाड़ा (राजस्व विभाग) की *सेवानिवृत्त शासकीय सेवक श्रीमती सीमा भारती जी*

*शासकीय सेवकों के सामाजिक दायित्व एवं मानवता के प्रति समर्पण का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कलेक्टर कार्यालय छिंदवाड़ा (राजस्व विभाग) की *सेवानिवृत्त शासकीय सेवक श्रीमती सीमा भारती जी*

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