दिनांक 24.11.2025 को प्रातः 05:30 से 06:00 बजे के बीच ग्राम मऊ, तहसील मोहखेड़, जिला छिन्दवाड़ा (वनपरिक्षेत्र सांवरी, पश्चिम छिन्दवाड़ा वनमंडल) के मुख्य सड़क के किनारे स्थित खेत में एक स्वस्थ बाघ दिखाई दिया।ग्रामीणों द्वारा दौड़ाए जाने पर बाघ दहशत में आकर पास के अरहर के खेत में छिपकर बैठ गया।परिक्षेत्र सहायक मोहखेड़ श्री पवन ढेपे एवं वनरक्षक मोहखेड़ द्वारा घटना प्रत्यक्ष रूप से देखी गई तथा तत्काल वनपरिक्षेत्र अधिकारी सांवरी सुश्री कीर्तिबाला गुप्ता को सूचित किया गया।प्रारंभिक कार्रवाईसूचना मिलते ही वनपरिक्षेत्र अधिकारी के निर्देशन में समस्त वन अमला लगभग 07:00 बजे तक मौके पर पहुंच गया।बाघ के छिपने वाले खेत की घेराबंदी कर दी गई तथा ग्रामीणों को समझाइश देते हुए पुलिस के सहयोग से दोनों ओर से बैरियर एवं स्टाफ लगाकर मार्ग पर यातायात रोक दिया गया, ताकि कोई जनहानि न हो और वन्यप्राणी को सुरक्षित निकासी दी जा सके।वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति एवं निर्णयसूचना पर मुख्य वनसंरक्षक, छिन्दवाड़ा, वनमंडलाधिकारी (पश्चिम/पूर्व छिन्दवाड़ा) एवं उपवनमंडलाधिकारी परासिया तथा छिन्दवाड़ा मौके पर उपस्थित हुए।मुख्य वनसंरक्षक श्री मधु वी. राज द्वारा उपस्थित स्टाफ को SOP के अनुसार सावधानीपूर्वक कार्य करने के निर्देश दिए गए।पेच टाइगर रिजर्व की टीम (वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट, SDO एवं वेटनरी डॉक्टर सहित) को बुलाया गया। स्थल निरीक्षण एवं वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा उपरांत बाघ को ट्रैंक्विलाइज कर रेस्क्यू न करने तथा रात्रि में उसे स्वाभाविक रूप से निकलने देने का निर्णय लिया गया।रात्रीकालीन निगरानी एवं सुरक्षा व्यवस्थाबाघ के छिपे खेत के चारों ओर कैमरा ट्रैप लगाए गए।आस-पास के ग्रामों में मुनादी करवा कर लोगों एवं मवेशियों को रात्रि में घर के अंदर रहने की अपील की गई।वन विभाग की टीम द्वारा पूरी रात बाघ की गतिविधियों पर निगरानी रखी गई।बाघ की सुरक्षित निकासीदिनांक 25.11.2025 को प्रातः लगभग 08:30 बजे टाइगर ट्रेल की जांच में स्पष्ट हुआ कि 24.11.2025 की रात को प्रत्यक्षदर्शियों के बताए अनुसार बाघ अरहर के खेत से निकलकर उत्तर-पूर्व दिशा में परिक्षेत्र से बाहर चला गया।खेत से लगभग 400 मीटर की दूरी तक जाने और वापस जंगल की ओर मुड़ने के पगमार्ग के स्पष्ट चिन्ह प्राप्त हुए।परासिया वनपरिक्षेत्र से डॉग स्क्वॉड बुलाकर मौके का निरीक्षण कराया गया, जिसमें बाघ का मूवमेंट जंगल की ओर होना पाया गया।SOP का निर्माण एवं संचालनबाघ के रेस्क्यू एवं प्रबंधन संबंधी Standard Operating Procedure का निर्णय वनमंडलाधिकारी श्री साहिल गर्ग के आदेशानुसार उपवनमंडलाधिकारी श्री विजेन्द्र खोब्रागड़े एवं श्री अनादि बुधौलिया द्वारा किया गया।उनके निर्देशानुसार समस्त कार्यों का संचालन वनपरिक्षेत्र अधिकारी सांवरी सुश्री कीर्तिबाला गुप्ता के नेतृत्व में फारेस्ट टीम एवं पुलिस टीम द्वारा सफलतापूर्वक किया गया।फारेस्ट टीम का उल्लेखनीय योगदानवनपरिक्षेत्र अधिकारी सांवरी: सुश्री कीर्तिबाला गुप्तास्टाफ: वनपाल श्री पवन ढेपे, आशीष दास, योगेश उईके, बसंत भालवी, अजय शिवहरे, परसराम कुमरे तथा वनरक्षक अरविंद टांडेकर, धनकुमार चौधरी, मनोज मालवी, हरिराम पवार, वाजिद अली निजामी, सुरेन्द्र परतेती, धमेन्द्र ब्रम्हे, रविन्द्र सोनी, राजेश दाळे, राहुल शर्मा, पियूष बेले, कमलेश मालवी, अरुण नागवंशी, विकास भारती, सुरेश भनारिया इत्यादि।वनपरिक्षेत्र अधिकारी छिन्दवाड़ा श्री नीरज चौहान एवं उनकी टीम: वनपाल सतीश पाटिल, वनरक्षक संतोष ठाकुर, सतीश डेहरिया, नितेन्द्र लोखंडे, ब्रजेश ठाकुर, परसराम उईके एवं अन्य कर्मचारी।अन्य विभागों का सहयोगतहसीलदार मोहखेड़ एवं उनकी टीम द्वारा प्रशासनिक सहयोग।थाना प्रभारी मोहखेड़ (TI) एवं पुलिस अमला द्वारा कानून-व्यवस्था, बैरिकेटिंग एवं भीड़ नियंत्रण में महत्वपूर्ण सहयोग।
*संवाददाता शुभम सहारे छिंदवाड़ा*


