पंचायतों को अधिकारों की सौगात: जल प्रबंधन से लेकर मास्टर प्लान तक
गांवों को सशक्त बनाने की नई पहल—सरकार ने बदला कामकाज का मॉडल
जल संरक्षण और जनभागीदारी पर फोकस: उत्कृष्ट जिलों को सम्मान
गांवों तक सुशासन की पहुंच—सीएम की घोषणाें बनी चर्चा का विषय
सरकार गांवों की चौखट पर: पंचायतों को सशक्त बनाने की नई पहल
भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय वॉटर शेड सम्मेलन में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्रामीण विकास की नई दिशा तय करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि अब पंचायतों को राजधानी के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, बल्कि सरकार ही उनके द्वार पर पहुंचकर समस्याओं का समाधान करेगी।
कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में शुरू हुए इस तीन दिवसीय आयोजन में प्रदेशभर से आए जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का उद्देश्य ग्रामीण शासन को अधिक सक्षम, आत्मनिर्भर और तकनीक-सक्षम बनाना है।
पंचायतों को विकास का अधिकार
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पंचायतों को कई नए वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार देकर उन्हें अधिक स्वतंत्र और निर्णयक्षम बनने का अवसर दिया। पंचायतों को स्थानीय जल प्रबंधन से लेकर ग्राम निवेश योजनाओं तक कई नीतियों में अब केंद्रीय भूमिका मिलेगी।
इसके साथ ही सरपंचों को 25 लाख रुपए तक की राशि अपने स्तर पर खर्च करने की अनुमति दी गई है, जिससे स्थानीय कार्यों की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है। विद्यालय निरीक्षण करने वाले पंचायत प्रतिनिधियों की रिपोर्ट भी अब शासन स्तर पर मान्य होगी।
जल संरक्षण पर नई सोच
कार्यक्रम का मुख्य फोकस जल संरक्षण रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी को बचाना केवल परंपरा नहीं, बल्कि समय की आवश्यकता है। जल संरक्षण अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों को सम्मानित किया गया, जिससे अन्य जिलों को भी प्रेरणा मिलेगी।
साथ ही किसानों के लिए सोलर पंप योजना को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाने की बात कही गई है, जिसमें किसानों को 90% तक अनुदान मिलेगा।
ग्राम स्वावलंबन है लक्ष्य
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद पटेल ने कहा कि आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ सामाजिक आत्मनिर्भरता भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने बताया कि आगामी दो वर्षों में प्रदेश की सभी पंचायतों में श्मशान घाट और संबंधित आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
ग्राम पंचायतों को सड़कों, आवास और मूलभूत सेवाओं से जोड़ने के लिए कई योजनाएं तेजी से लागू की जा रही हैं।


