भोपाल, — मध्यप्रदेश सरकार ने ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाने के उद्देश्य से सचिव भर्ती प्रणाली में व्यापक सुधारों की घोषणा की है। नए नियमों के लागू होने के साथ ही ग्रामीण स्तर पर डिजिटल प्रशासन को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
डिजिटल स्किल्स अब अनिवार्य
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि आगामी भर्तियों में उम्मीदवारों के लिए कंप्यूटर आधारित कार्यों में दक्षता आवश्यक होगी। इसके लिए CPCT (Computer Proficiency Certification Test) को अनिवार्य मानदंड बनाया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से ई-गवर्नेंस और ऑनलाइन सेवाओं की पहुंच गांवों तक तेज़ी से बढ़ेगी।
पुराने नियम हुए खत्म
नए सुधारों के लागू होने के बाद वर्ष 2011 से प्रभावी पुरानी भर्ती प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार 11 दिसंबर 2025 से समूचे प्रदेश में नवीन नियम लागू हो जाएंगे।
23 हजार से अधिक पदों को मंजूरी
सरकार ने सभी ग्राम पंचायतों के लिए 23,011 पदों को स्वीकृति दी है। खास बात यह है कि वर्षों से कार्यरत ग्राम रोजगार सहायकों को इन पदों में 50% आरक्षण का लाभ मिलेगा। यह कदम जमीनी स्तर पर काम कर रहे युवाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भर्ती MP कर्मचारी चयन मंडल से
भर्ती परीक्षा का आयोजन राज्य कर्मचारी चयन मंडल द्वारा किया जाएगा। आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास स्नातक डिग्री और वैध CPCT सर्टिफिकेट होना अनिवार्य होगा।
वेतनमान और सेवा शर्तें
नियुक्ति के बाद सचिवों को सातवें वेतनमान के अनुसार वेतन मिलेगा।
- प्रोबेशन अवधि: दो वर्ष
- प्रोबेशन के दौरान वेतन: ₹10,000 प्रतिमाह
- आगे आठ वर्षों के लिए वेतनमान: ₹19,500 से ₹62,000 प्रतिमाह
- दस वर्ष की सेवा पूर्ण होने पर: ₹23,500 से ₹80,500 प्रतिमाह
सेवा निवृत्ति की आयु 62 वर्ष निर्धारित की गई है तथा कर्मचारियों को सिविल सेवा नियमों के तहत सभी प्रकार की अवकाश और सुविधाएँ प्राप्त होंगी।
ग्राम शासन मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल कौशल का अनिवार्य होना ग्रामीण प्रशासन को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने का दीर्घकालिक प्रयास है। इससे न केवल सेवा वितरण में तेजी आएगी, बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी मीडिया सूत्र


