डॉक्टर को भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है l वहीं शासन ने भी स्वास्थ्य केंद्रों को आरोग्य मंदिर का नाम दिया है। और इस मंदिर मैं (CHO) कम्युनिटी हेल्थ ऑफीसर को बैठाया गया है।ताकि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओ का लाभ ले सके । और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लागू करना, जैसे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, संचारी रोग नियंत्रण,गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण क्षय रोग (टीवी)और टेली-परामर्श जैसी सेवाएं प्रदान करना होताहै
परंतु कटनी जिले की रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के ग्राम करहैया मैं बने आयुष्मान आरोग्य मंदिर (मझगवा) होने पर भी,गांव के ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधा का लाभ नहीं मिल पाना यह स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को उजागर करता है ।
यहां के रहवासियों का आरोप है कि यह स्वास्थ्य केंद्र हफ्ते मैं एकाद दिन खुलता है, जिससे मरीजों को भरी दिक्कतो का सामना करना पड़ता हैं। गांव के ग्रामीणों की परेशानी उस वक्त और बढ़ जाती है । जब कोई मरीज गंभीर होकर ,इलाज के लिए केन्द्र पहुंचते हैं। और वहां जाने के बाद पता चलता है कि केन्द्र तो बंद है। अब मरीज क्या करे l फिर वह होकर लगभग 12 किलोमीटर का सफर तय कर रीठी सरकारी अस्पताल या मोटी रकम खर्च कर झोलाछाप डॉक्टरों की शरण लेता हैं । आरोग्य मंदिर का बंद रहना, स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही को उजागर करता हैl
वही आरोग्य मंदिर में सूचना पटल पर दरसाया गया है कि 8/11/2025 की मीटिंग रीठी मैं होने की बात लिखी गई है ।
अब सवाल यह उठता है कि जब मीटिंग होने की सूचना पटल लिखी गया,,।तो 10/11/2025 को की सूचना पटल पर न लिखा जाना,, ग्रामीणों को गुमराह करने के बराबर है । जो सीएचओ की लापरवाही को भी उजागर करता है l
वही ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि आरोग्य मंदिर को प्रतिदिन खोला जाए तथा प्रशानिक कार्य हेतु केंद्र बंद होने की सूचना को पटल पर दर्शाया जाए ताकि ग्रामीण भ्रमित न हो और उन्हे स्वाथ्य सुविधा मिल सके।
हरिशंकर बेन


