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उमरियापान | जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पोड़ी कला बी के अंतर्गत आने वाला आश्रित ग्राम नदिया टोला आज अपनी मूलभूत जरूरतों के लिए तरस रहा है। विकास की कई योजनाओं की घोषणा के बावजूद यहां की धरातलीय स्थिति आज भी बेहद चिंताजनक है। गली-कूचों में पसरी गंदगी, सड़क व्यवस्था का अभाव, समय पर साफ-सफाई न होना, एंबुलेंस जैसी जीवन-रक्षक सेवा का गांव के भीतर तक न पहुंच पाना ये सभी समस्याएं मिलकर नदिया टोला के ग्रामीणों की जिंदगी को मुश्किल बना रही हैं। गांव के लोगों का स्पष्ट कहना है कि वर्षों से स्थिति जस की तस बनी हुई है और किसी भी जनप्रतिनिधि या विभाग की ठोस पहल अब तक देखने को नहीं मिली है।
*गंदगी का अंबार बीमारियों का बड़ा खतरा*
नदिया टोला की सबसे गंभीर समस्या है गंदगी का अंबार । गांव के नालों की सफाई महीनों से नहीं हुई है। जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं, जिनसे लगातार बदबू उठती रहती है। बरसात के दिनों में यह समस्या और भी बढ़ जाती है। रुका हुआ पानी मच्छरों के प्रजनन का बड़ा केंद्र बन जाता है, जिससे ग्रामीण मलेरिया, डेंगू और वायरल बुखार जैसी बीमारियों के खतरे से घिर जाते हैं। छोटे बच्चे इस माहौल में खेलते हैं, बुजुर्ग इसी रास्ते से गुजरते हैं, महिलाओं को घर-परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इन कचरे भरी गलियों से होकर जाना पड़ता है। गांव के लोगों का कहना है कि कई बार उन्होंने पंचायत स्तर पर शिकायत की, लेकिन सफाई व्यवस्था सिर्फ कागजों पर दिखती है, जमीनी रूप से कोई कार्रवाई नजर नहीं आती।
*एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी*
गांव की सबसे दर्दनाक समस्या यह है कि एंबुलेंस गांव के अंदर तक नहीं जा पाती। कच्ची और टूटी हुई गलियों के कारण वाहन गांव के प्रवेश मार्ग से आगे नहीं बढ़ पाते। कई बार गंभीर मरीजों को चारपाई या मोटरसाइकिल के सहारे मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है, जहां एंबुलेंस इंतजार करती रहती है। इस दौरान कई मरीजों की हालत बिगड़ जाती है।गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक दिक्कत होती है। प्रसव पीड़ा की स्थिति में परिजन उन्हें घर से मुख्य मार्ग तक ले जाने में परेशान हो जाते हैं। कई मामलों में जोखिम भी बढ़ जाता है क्योंकि समय पर अस्पताल न पहुंच पाने का सीधा असर प्रसूता और बच्चे की सेहत पर पड़ता है।ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत और स्वास्थ्य विभाग को बार-बार अवगत कराने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। सड़क ना होने के कारण जीवन और मौत के बीच की दूरी कई बार बढ़ जाती है।
*मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी ग्रामीण रह गए वंचित*
नदिया टोला में सड़क, स्वच्छ पेयजल, नालियों का सही निर्माण, शौचालयों का अभाव, स्ट्रीट लाइट की कमी, जैसे कई मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं। गांव में आज भी कच्ची सड़कें हैं जो बरसात में दलदल बन जाती हैं। बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है, ग्रामीणों को अस्पताल, बाजार और सरकारी दफ्तरों तक पहुंचने में दिक्कत आती है।पेयजल की समस्या भी गंभीर है। कई स्थानों पर हैंडपंप खराब पड़े हैं और पाइपलाइन की व्यवस्था अधूरी है, जिसके कारण ग्रामीणों को दूर-दूर पानी भरने जाना पड़ता है। बिजली कटौती और स्ट्रीट लाइट का अभाव शाम ढलते ही पूरे गांव को अंधेरे में धकेल देता है, जिससे सुरक्षा समस्या भी बढ़ जाती है।
*जनप्रतिनिधि और पंचायत की जवाबदेही पर सवाल*
नदिया टोला के ग्रामीणों में प्रशासन और पंचायत के प्रति गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि चुनाव के समय नेता यहां आते हैं, विकास का बड़ा वादा करते हैं, लेकिन चुनाव बीतते ही सबकुछ भूल जाते हैं। पंचायत स्तर पर सफाईकर्मियों की संख्या कम है और जो हैं वे भी नियमित रूप से काम नहीं करते। साथ ही, गांव में सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ भी नहीं पहुंच पाता। कई गरीब परिवारों को आवास योजना, शौचालय योजना या जल योजना का लाभ अब तक नहीं मिला है। ग्रामीणों का आरोप है कि योजनाएं कागजों में पूरी दिखती हैं, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं बदलता।
*महिलाएं और बुजुर्ग सबसे बड़ी पीड़ित*
गंदगी, रास्तों की कठिनाई और स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव का सबसे गहरा असर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ता है। महिलाएं पानी भरने, राशन लेने और दैनिक कार्यों के लिए गंदगी भरी गलियों से गुजरती हैं। बुजुर्ग बीमार होने पर अस्पताल तक पहुंचने में परेशान हो जाते हैं। रात के समय अंधेरा होने के कारण सुरक्षा संबंधी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। गांव की महिलाएं साफ-सफाई और एंबुलेंस की समस्या को लेकर कई बार पंचायत में आवाज उठा चुकी हैं, लेकिन समाधान अब तक नहीं मिल पाया है।
रिपोर्टर राजेंद्र कुमार चौरसिया धीमरखेडा कटनी


