नदी का छलनी होता सीना, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल**
उमरियापान। ग्राम पंचायत महनेर के आश्रित ग्राम वीरान घुघरी में रेत का अवैध उत्खनन पिछले कई महीनों से बेखौफ तरीके से जारी है। रेत माफियाओं के इस खुले खेल ने न केवल शासन–प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को लेकर गंभीर चिंताएँ भी उत्पन्न कर दी हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक क्षेत्र की नदियाँ, जो कभी शांत, स्वच्छ और जीवनदायिनी थीं, अब माफियाओं की निर्बाध खुदाई के कारण गहरे गड्ढों में तब्दील होती जा रही हैं। नदी का प्राकृतिक स्वरूप बदल चुका है और जलस्तर लगातार नीचे गिर रहा है।
मजबूत नेटवर्क, मगर कार्रवाई शून्य
ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध उत्खनन का पूरा नेटवर्क प्रभावशाली ठेकेदारों व माफियाओं के संरक्षण में चलता है। शिकायतों के बावजूद कार्रवाई का स्तर नगण्य है, जिससे माफियाओं के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।
नियमों के अनुसार रेत निकासी सीमित मात्रा, मानव श्रम, पर्यावरणीय अनुमति और निर्धारित समय सीमा में ही हो सकती है, परंतु वीरान घुघरी में इनमें से एक भी नियम का पालन नहीं होता। बड़े पैमाने पर मशीनों से उत्खनन कर नदियों को छलनी किया जा रहा है।
ग्रामीणों में भय, माफिया की दबंगई चरम पर
आवाज उठाने पर ग्रामीणों को धमकियाँ मिलती हैं। कई लोग सुरक्षा के चलते शिकायत तक दर्ज नहीं करा पाते। तेज रफ्तार ट्रैक्टर–ट्रॉलियों का आवागमन सड़कों को खतरनाक बना चुका है। धूल और अव्यवस्था ने ग्रामीण जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।
पर्यावरण पर गहरा खतरा
अवैध उत्खनन के कारण—
- नदी किनारों का कटाव तेजी से बढ़ रहा है
- खेतों को नुकसान की आशंका
- जलस्तर में गिरावट
- जैविक संतुलन बिगड़ने की स्थिति
- भविष्य में जल संकट का खतरा
वृक्षों की जड़ों तक खुदाई होने से नदी के आसपास का सम्पूर्ण पर्यावरण प्रभावित हो चुका है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतना बड़ा अवैध उत्खनन आखिर बिना संरक्षण के कैसे संभव हो रहा है? पंचायत की भूमिका पर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं—क्या क्षमता का अभाव है या कहीं न कहीं मूक सहमति?
ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन प्राकृतिक संसाधनों की लूट किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जा सकती।
ग्रामीणों की मांग — सख्त कार्रवाई हो
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—
- तत्काल अवैध उत्खनन रोका जाए
- मशीनरी जब्त कर भारी जुर्माना लगाया जाए
- रेत माफिया के खिलाफ उच्चस्तरीय जांच हो
- नदी को बचाने के लिए ठोस कार्ययोजना बने
यदि कानून सख्ती से लागू किया जाए तो कुछ ही दिनों में अवैध उत्खनन पर लगाम लग सकती है। लेकिन जब कार्रवाई सिर्फ कागज़ों तक सिमटी रह जाती है तो माफियातंत्र और मजबूत होता जाता है।
वीरान घुघरी की यह स्थिति सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में फैलते उस चिंताजनक संक्रमण का संकेत है, जिसमें मुनाफे के लोभ में प्राकृतिक संपदाओं को नष्ट किया जा रहा है।
रिपोर्टर — राजेंद्र कुमार चौरसिया
धीमरखेड़ा,


