कटनी। मध्यप्रदेश शासन द्वारा परंपरागत कुम्हार समाज को मिट्टी की ईंट एवं बर्तन निर्माण हेतु भसुआ रेत पर दी गई रायल्टी छूट के बावजूद कटनी जिले में रेत ठेकेदारों और पुलिस द्वारा अवैध रूप से रायल्टी वसूले जाने के विरोध में प्रजापति/कुम्हार/चक्रवर्ती समाज ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है।
ज्ञापन में कहा गया कि समाज के लोग पीढ़ी-दर-पीढ़ी मिट्टी की ईंट, कबेलू और बर्तन बनाकर आजीविका चला रहे हैं। शासन ने ऐसे परंपरागत कुम्हारों को खनिज (माइनिंग) विभाग के माध्यम से भसुआ रेत की रायल्टी से मुक्त किया है, और इस संबंध में आदेश सभी जिलों के कलेक्टरों को भेजे जा चुके हैं।
इसके बावजूद, कटनी जिले में रेत ठेकेदार शासनादेश की खुलेआम अवहेलना कर रहे हैं। मिट्टी की ईंट बनाने के लिए रेत लाने वाले वाहनों को रोककर ठेकेदार मनमाने तरीके से रायल्टी वसूलते हैं। वहीं, कुछ थाना क्षेत्रों की पुलिस इन वाहनों को जब्त कर थानों में खड़ा करवा देती है और अवैध राशि वसूलने का दबाव बनाती है।
समाज ने बताया कि इस विषय पर 11 मार्च 2025 को भी ज्ञापन दिया गया था, परंतु अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। परिणामस्वरूप कुम्हार समाज के लोग आज अपने पारंपरिक व्यवसाय को जारी रखने में भारी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
कुम्हार समाज की मुख्य मांगें —
शासन द्वारा प्रदत्त भसुआ रेत रायल्टी छूट का तत्काल पालन सुनिश्चित किया जाए।
रेत ठेकेदारों एवं थाना पुलिस को निर्देशित किया जाए कि अनुवांशिक कुम्हारों से किसी भी प्रकार की रायल्टी वसूली न की जाए।
पुलिस द्वारा बिना कारण रेत लाने वाले वाहनों को थानों में खड़ा करने की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
कुम्हार समाज ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिवस के भीतर इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी नहीं किए गए, तो समाज विधिक दृष्टि से आंदोलन करने को बाध्य होगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।


