रीठी मैं आपातकालीन सेवाए देने वाला स्वस्थ्य विभाग में तैनात डॉक्टर न तो मुख्यालय मैं और न ही अस्पताल मैं नही रहते है। यहां रोजाना अप डाउन की प्रथा कायम है । चाहे डॉक्टर हो या फिर एनआरसी ,लैब टेक्नीशियन या कोई भी कर्मचारी सभी 12 बचे ही अपनी मर्जी अनुसार अस्पताल पहुंच कर रस्म अदायगी कर रहे हैं । और सुबह 9 बजे से खुलने वाली ओपीडी में मरीज को देखने के लिए नेत्र सहायक चिकित्सा या किसी आरोग्य मंदिर मैं ताला लगवाकर सीएचओ को बैठा दिया जाता है। जबकि बीएमओ या एमओ डॉक्टर ही मरीजो को देखने की सही जिम्मेदारी निभा सकते हैं क्योंकि वह चिकित्सा अनुसार मरीज को दवा एवम अस्पताल मैं भर्ती कर सकते है । दूसरी ओर यदि आपातकालीन स्थिति में कोई गंभीर बीमारी या घटित घटना से ग्रसित मरीज पहुंच जाए l और डॉक्टर की उपस्थिति न होने की वजह से उसकी जान भी जा सकती है।
वही बीते 24 अक्टूबर की शाम को हुई एक्सीडेंटल से घायल हुए मरीज 20,25 मिनट गुजर जाने के बावजूद भी डॉक्टर अस्पताल से नदारत रहे थे। अक्सर यहां ऐसा होता है कि जब ड्यूटी पर तैनात स्टाप नर्स ही डॉक्टर से फोन पर संपर्क कर उसकी मरहम पट्टी करती है
लेकिन यहां किसी उच्च अधिकारियों को कोई फर्क नहीं पड़ता ,सब राजा की फौज जैसा माहौल चल रहा है किसी को कोई फर्क ही नहीं पड़ता जब बीएमओ ही अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे तो आप कर्मचारियों से क्या अपेक्षा कर सकते है।
हरिशंकर बेन,,


