रिपोर्ट चंद्रिका यादव चंदौली
शिकारगंज क्षेत्र के बाबा जागेश्वर नाथ हेतिमपुर में संगीतमयी श्री राम कथा के दूसरे दिन जौनपुर से पधारे कथा व्यास पंडित रामेश्वरानंद जी महाराज ने शिव चरित्र का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने मां पार्वती के जन्म, कामदेव के भस्म होने और भगवान शिव के विवाह के लिए सहमत होने की कथा सुनाई।
बाबा जागेश्वर नाथ सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कथा में व्यास जी ने बताया कि राजा दक्ष प्रजापति ने भगवान शंकर का अपमान करने के उद्देश्य से एक महायज्ञ का आयोजन किया था। इसमें उन्होंने भगवान शिव को छोड़कर सभी देवताओं को आमंत्रित किया था। भगवान शंकर के मना करने के बावजूद, माता सती ने अपने पिता के यहां जाने की इच्छा व्यक्त की, जिस पर भगवान शंकर ने बिना बुलाए जाने पर कष्ट भोगने की बात कही थी।
इसके बावजूद, माता सती नहीं मानीं और पिता के घर चली गईं। वहां अपने पिता द्वारा भगवान शंकर के अपमान को देखकर सती ने हवन कुंड में कूदकर स्वयं को अग्नि को समर्पित कर दिया। इस घटना के बाद भगवान शंकर के दूतों ने यज्ञ स्थल को तहस-नहस कर दिया, और माता सती के अग्नि में प्रवाहित होने से तीनों लोकों को भगवान शिव के क्रोध का सामना करना पड़ा।
कथा व्यास पंडित रामेश्वरानंद जी ने श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि पति-पत्नी को सुख-दुख में हमेशा साथ रहना चाहिए, जिससे परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। उन्होंने यह भी बताया कि श्री राम कथा सुनने से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है, विवेक में वृद्धि होती है और परमात्मा से मिलन परीक्षा लेने से नहीं बल्कि प्रतीक्षा करने से मिलता है।
इस अवसर पर बाबा जागेश्वर नाथ के महंत अनूप गिरी, समिति अध्यक्ष अरविंद सिंह जयशंकर प्रसाद रामभरोम , उषा देवी, अर्चना देवी ,साक्षी सिंह, योगेंद्र बहादुर सिंह ,सरिता पांडे ,प्रेमशिला ,आजाद शर्मा ,जयप्रकाश पाल, श्रवण पांडे सैकड़ो की संख्या में श्री राम कथा श्रवण किया
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