उमरियापान । ग्राम पंचायत उमरियापान में व्याप्त अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्राम के निवासी प्रदीप चौरसिया ने कलेक्टर आशीष तिवारी से शिकायत कर पंचायत में चल रहे घटिया निर्माण कार्यों, अव्यवस्थाओं और सरपंच-सचिव की मनमानी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। शिकायत पर कलेक्टर तिवारी ने गंभीरता दिखाते हुए जांच और आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया है। शिकायत में प्रदीप चौरसिया ने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत उमरियापान में अधिकांश निर्माण कार्य गुणवत्ताहीन तरीके से कराए जा रहे हैं। पंचायत द्वारा स्वीकृत निर्माण कार्यों का न तो मूल्यांकन कराया गया है, और न ही तकनीकी मानकों का पालन किया जा रहा है। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा बिना मूल्यांकन के ही राशि का आहरण (निकासी) कर लिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सचिव केवल पैसे निकालने के लिए ही पंचायत कार्यालय आते हैं, जबकि पंचायत के नियमित कार्यों से उनका कोई सरोकार नहीं है।
*ग्राम में गंदगी का अंबार, नालियों से सड़क पर बह रहा गंदा पानी*
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि ग्राम उमरियापान में स्वच्छता की स्थिति अत्यंत दयनीय है। ग्राम में जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। नालियों की नियमित सफाई नहीं होने से उनमें जमा गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने कई बार पंचायत से सफाई व्यवस्था सुधारने की मांग की, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
*’नॉट फॉर रिटेल’ सीमेंट का उपयोग, नियमों की खुलेआम अवहेलना*
सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि पंचायत द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों में ‘नॉट फॉर रिटेल’ श्रेणी के सीमेंट का उपयोग किया जा रहा है। यह सीमेंट सामान्य उपयोग के लिए नहीं होता, बल्कि केवल बड़े ठेकेदारों और निर्माण कंपनियों के लिए आरक्षित रहता है। यह सीमेंट खुले बाजार में बेचा नहीं जा सकता। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि ऐसे सीमेंट की आपूर्ति पंचायत तक कैसे पहुंची, इसकी जांच आवश्यक है। ग्राम पंचायत में हो रहे प्रत्येक निर्माण कार्य में इसी ‘नॉट फॉर रिटेल’ सीमेंट का उपयोग किया जा रहा है, जो सरकारी नियमों और मानकों के पूरी तरह खिलाफ है। प्रदीप चौरसिया ने मांग की है कि इसकी आपूर्ति श्रृंखला और उपयोग की जांच जिला प्रशासन द्वारा कराई जाए ताकि जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जा सके।
*बिना स्टीमेट के निर्माण, सरपंच के पुत्र का हस्तक्षेप*
शिकायत के अनुसार, ग्राम पंचायत में कोई भी निर्माण कार्य स्वीकृत स्टीमेट के आधार पर नहीं कराया जा रहा है। पंचायत द्वारा पारित कार्यों में स्टीमेट की राशि से अधिक खर्च किया जा रहा है और ठेकेदारों से सीधे काम करवाया जा रहा है। कई कार्यों में सरपंच के पुत्र का सीधा हस्तक्षेप बताया गया है। ग्राम में निर्मित किए जा रहे छोटे-छोटे रंगमंच (स्टेज) के संबंध में ठेकेदारों ने बताया कि ये निर्माण कार्य सरपंच और उनके बेटे के निर्देश पर कराए जा रहे हैं, जबकि इस कार्य की स्वीकृत राशि लगभग ₹1 लाख 90 हजार है। ग्रामीणों का कहना है कि यह राशि वास्तविक कार्य की तुलना में अत्यधिक है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
*सामुदायिक भवन के पास घटिया निर्माण, गरीबों के साथ भेदभाव*
शिकायत में यह भी बताया गया है कि पंचायत द्वारा सामुदायिक भवन के पास बनाई जा रही बाउंड्रीवॉल का निर्माण पूरी तरह से गुणवत्ताहीन है। निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है। सरपंच और उनके पुत्र पर यह आरोप है कि वे निर्माण कार्य में पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बाउंड्रीवॉल के निर्माण के दौरान सरपंच अपने चहेते व्यक्तियों की शासकीय भूमि को छोड़ देते हैं, जबकि गरीबों की भूमि को जबरन घेरकर बाउंड्री में शामिल कर लिया जाता है। जब प्रभावित लोग विरोध करते हैं तो सरपंच द्वारा उन्हें यह कहकर धमकाया जाता है कि “जिसे वोट दिया है, उसी से जाकर अपनी जमीन छुड़वाओ।” यह बयान ग्रामीणों में भारी आक्रोश का कारण बना हुआ है। पंचायत की इस कार्यप्रणाली से लोग नाराज हैं और प्रशासन से न्याय की मांग कर रहे हैं।
रिपोर्टर राजेंद्र कुमार चौरसिया धीमरखेडा कटनी


