उमरियापान | ग्राम पंचायतें देश के ग्रामीण विकास की सबसे छोटी किंतु अत्यंत महत्वपूर्ण इकाई हैं। पंचायत स्तर पर विकास कार्यों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ बनाना और पारदर्शिता के साथ जनहित के कार्यों को अंजाम देना होता है। किंतु कई बार इन कार्यों में नियमों की अनदेखी, भ्रष्टाचार और तकनीकी मानकों की अवहेलना देखने को मिलती है। ऐसा ही एक मामला ग्राम पंचायत उमरियापान में सामने आया है, जहाँ रंगमंच निर्माण कार्य में भारी अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। ग्राम पंचायत उमरियापान में लगभग ₹1,90,000 (एक लाख नव्वे हजार रुपये) की लागत से रंगमंच (मंच) का निर्माण कार्य किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, ग्राम में कुल चार रंगमंचों का निर्माण एक साथ कराया जा रहा है।इन निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी पंचायत की है, किंतु पंचायत द्वारा निर्माण कार्य को ठेकेदार को सौंप दिया गया है, जो कि पंचायत नियमों के विपरीत है।

*नियमों का उल्लंघन, होना चाहिए कार्यवाही*
ग्रामीण विकास विभाग और पंचायती राज अधिनियम के अंतर्गत, पंचायत स्तर पर होने वाले निर्माण कार्यों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए हैं। निर्माण एजेंसी के रूप में पंचायत ही जिम्मेदार होती है। किसी भी पंचायत को अपने क्षेत्र में होने वाले कार्यों का ठेका निजी ठेकेदार को देने की अनुमति नहीं होती। पंचायत को स्वयं श्रमदान, मजदूरी और स्थानीय संसाधनों के माध्यम से कार्य संपन्न करना चाहिए।पंचायत कार्यों में ठेकेदारी प्रणाली निषिद्ध है। ऐसा इसलिए ताकि पंचायत स्तर पर पारदर्शिता बनी रहे और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकें। परंतु उमरियापान पंचायत ने इन नियमों की अनदेखी करते हुए निर्माण कार्य को ठेके पर दे दिया, जो कि सीधा नियमों का उल्लंघन है, निर्माण कार्य में प्लिंथ बीम (नींव की बीम) डाले बिना सीधे लेंटर (छत) का निर्माण किया गया है। यह न केवल तकनीकी दृष्टि से गलत है, बल्कि भवन की सुरक्षा और मजबूती पर गंभीर प्रश्न उठाता है। बिना प्लिंथ बीम के भवन का भार सीधे दीवारों पर पड़ता है, जिससे भविष्य में दरारें आने, झुकाव होने या ढह जाने का खतरा बढ़ जाता है।
*गुणवत्ता में गिरावट और सीमेंट का दुरुपयोग*
सूत्रों के अनुसार, निर्माण कार्य में “नॉट फॉर सेल” सीमेंट का उपयोग किया जा रहा है। यह वह सीमेंट होती है जो उद्योगों द्वारा परीक्षण या विशेष प्रयोजनों के लिए बनाई जाती है, और आम निर्माण कार्यों में इसके उपयोग की अनुमति नहीं होती। पंचायती राज विभाग के निर्देशों के अनुसार, ग्राम पंचायत स्तर के निर्माण कार्यों में “नॉट फॉर सेल” सीमेंट का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। इस प्रकार का सीमेंट प्रयोग करने से निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव पड़ता है और यह सरकारी धन के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।
*वित्तीय अनियमितताएँ और पारदर्शिता का अभाव*
रंगमंच निर्माण के लिए स्वीकृत राशि ₹1.90 लाख प्रति मंच है। यदि चार मंचों का निर्माण हो रहा है, तो कुल राशि लगभग ₹7.6 लाख के आसपास बैठती है। इस राशि का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है, इस पर कोई स्पष्ट अभिलेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराया गया है। माप पुस्तिका , वाउचर, बिल और निर्माण सामग्री की खरीद संबंधी दस्तावेजों की जांच करने पर कई गड़बड़ियाँ सामने आ सकती हैं। यह स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि पंचायत में वित्तीय पारदर्शिता का अभाव है।पंचायत को निर्माण कार्यों के लिए तकनीकी सहायक (इंजीनियर) से अनुमोदन लेना आवश्यक है। कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए साइट निरीक्षण रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए। निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्री जैसे रेत, सीमेंट, गिट्टी आदि का सही रिकॉर्ड रखा जाना चाहिए। कार्य पूरा होने के बाद सार्वजनिक लेखा परीक्षण (ऑडिट) किया जाना चाहिए। परंतु उमरियापान पंचायत में इन सभी बिंदुओं की अनदेखी होती प्रतीत होती है। न तो कार्य का तकनीकी निरीक्षण हो रहा है, न ही किसी अधिकृत इंजीनियर की उपस्थिति में निर्माण कराया जा रहा है।
*जनता के धन से खिलवाड़*
ग्राम पंचायत का धन जनता का धन होता है। इसका उपयोग पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होना चाहिए। जब इस धन का दुरुपयोग होता है, तो इससे न केवल आर्थिक हानि होती है, बल्कि जनता के बीच पंचायत की विश्वसनीयता भी समाप्त हो जाती है।
रंगमंच जैसे सार्वजनिक स्थानों का निर्माण यदि निम्न गुणवत्ता का होगा, तो कुछ वर्षों में वह जर्जर हो जाएगा, जिससे पुनर्निर्माण की आवश्यकता पड़ेगी यह सीधा जनधन की बर्बादी है।
*इनका कहना हैं*
रंगमंच एक लाख 90 हजार रुपए का हैं।
*सचिव राजकुमार पटैल*
ग्राम पंचायत उमरियापान में जो अनियमितताएँ हैं उसकी नियमानुसार जांच कराकर कार्यवाही की जाएंगी।
*यजुर्वेंद्र कोरी जनपद सीईओ ढीमरखेड़ा*
रिपोर्टर राजेंद्र कुमार चौरसिया धीमरखेडा कटनी


