उमरियापान | जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा की ग्राम पंचायत उमरियापान में इन दिनों पंचायत स्तर पर चल रहे निर्माण कार्यों को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। मामला पांचवें वित्त आयोग से स्वीकृत बाउंड्री वॉल निर्माण का है, जिसमें सरपंच पर भारी अनियमितताओं और पक्षपात के आरोप लग रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच अटल ब्यौहार ने इस कार्य में अपने चहेतों को खुली छूट दे रखी है और खुलेआम नियमो की धज्जियां उड़ाई जा रही है बाउंड्री वॉल का निर्माण कही आड़ा तो कही तिरछा करके कराया जा रहा हैं।जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत उमरियापान में लगभग 15 लाख रुपये की लागत से बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया जा रहा है। यह कार्य मूल रूप से नगद भुगतान की श्रेणी में आता है, लेकिन सरपंच द्वारा इसे मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के तहत करवाया जा रहा है। बाउंड्री वॉल में 20 मजदूर कार्य कर रहे हैं, लक्ष्मी कोल, वर्षा कोल, ललिता कोल, मूंगा बाई, अंकिता चक्रवर्ती, संगीता चक्रवर्ती, पारवती बाई, गोरी बाई, सत्तो बाई, अंजना बाई, पम्मी बाई, निब्बो बाई, उषा बाई, आदि लोगों ने बताया कि रोजगार गारंटी से कार्य कराया जा रहा हैं। लिहाज़ा भुगतान शिवशंकर बर्मन को किया जा रहा हैं पंचायत के माध्यम से जबकि आम जनता का प्रश्न हैं कि शिवशंकर बर्मन आखिर कौन हैं जिसके खाते में भुगतान हों रहा हैं, भुगतान होने के बाद पंचायत के जिम्मेदार शिवशंकर बर्मन से भुगतान की राशि लेकर मजदूरों का भुगतान करते हैं, यह न केवल नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग का भी एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है, विदित है कि नॉट फॉर रिटेल सेल सीमेंट का उपयोग किया जा रहा हैं जो कि नियम विरुद्ध हैं, नियमों के अनुसार, नॉट फॉर रिटेल सेल सीमेंट का उपयोग सिर्फ सरकारी ठेकेदार या बड़ी निर्माण कंपनियां कर सकती हैं। इस सीमेंट को आगे बेचा नहीं जा सकता ।
*नियमों के विपरीत मनरेगा से करवाया जा रहा कार्य*
मनरेगा योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना है, जिसके तहत मजदूरी आधारित कार्य किए जाते हैं। किन्तु बाउंड्री वॉल जैसे निर्माण कार्य, जिनमें तकनीकी और ठेकेदारी स्तर की प्रक्रिया शामिल होती है, आमतौर पर मनरेगा से नहीं करवाए जा सकते। इस प्रकार के कार्यों के लिए पांचवें वित्त आयोग या पंचायत निधि से नगद भुगतान की व्यवस्था होती है, लेकिन उमरियापान पंचायत में इसके विपरीत हो रहा है। यहां सरपंच ने पारदर्शिता को दरकिनार कर, बाउंड्री वॉल निर्माण को मनरेगा के अंतर्गत शामिल कर लिया है। इससे न केवल योजना की भावना को ठेस पहुँची है, बल्कि मजदूरों के मजदूरी भुगतान और सामग्री आपूर्ति में भी गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।
*संपूर्ण प्रक्रिया पर सरपंच पुत्र का नियंत्रण*
ग्रामीणों की मानें तो सरपंच अटल ब्यौहार स्वयं पंचायत कार्यालय में कम ही दिखाई देते हैं, जबकि उनके पुत्र प्रतिदिन कार्यालय में बैठकर सभी कार्यों का संचालन करते हैं। यही व्यक्ति निर्माण कार्यों की माप-तौल, मजदूरी का हिसाब, और मनरेगा से जुड़ी ऑनलाइन एंट्रियां तक संभाल रहा है। यह स्थिति पंचायती राज अधिनियम के पूरी तरह विरुद्ध है।कानूनी प्रावधानों के अनुसार, पंचायत कार्यों में किसी भी निर्वाचित प्रतिनिधि के परिजन का सीधा हस्तक्षेप पूर्णतः वर्जित है, क्योंकि इससे हितों का टकराव पैदा होता है। लेकिन उमरियापान में सरपंच पुत्र खुलेआम सरकारी कुर्सी पर बैठकर निर्णय ले रहे हैं।
*पारदर्शिता पर उठे सवाल, जिम्मेदार अंजान*
पंचायत नियमों के अनुसार, किसी भी कार्य के आरंभ से पहले ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित किया जाना आवश्यक है। साथ ही, कार्य की जानकारी और लागत का प्रदर्शन सूचना पट्ट पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाना चाहिए। किंतु उमरियापान में ऐसा कोई सूचना पट्ट नहीं लगाया गया है। स्रोतों के अनुसार, पांचवें वित्त से स्वीकृत यह बाउंड्री वॉल परियोजना लगभग 15 लाख रुपये की है। इतनी बड़ी राशि के उपयोग में अगर नियमों का पालन नहीं किया गया तो यह न केवल वित्तीय अनियमितता है बल्कि भ्रष्टाचार की श्रेणी में भी आता है।
*जनता में बढ़ता असंतोष, आम नागरिक परेशान*
ग्राम उमरियापान के कई नागरिकों ने बताया कि पंचायत की कार्यशैली पर उनका भरोसा उठ चुका है। जिन योजनाओं का उद्देश्य आमजन के हित में होता है, उन्हें कुछ गिने-चुने लोगों के हित में विकृत किया जा रहा है।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराई जाए और सरपंच व संबंधित अधिकारियों पर वित्तीय अनियमितता, पद का दुरुपयोग, और नियम उल्लंघन के मामले में कार्रवाई की जाए। वे यह भी चाहते हैं कि पंचायत में हो रहे सभी निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच और ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके ।
*इनका कहना हैं*
नगद भुगतान के मजदूर लगे हुए हैं
*सचिव राजकुमार पटैल*
रिपोर्टर राजेंद्र कुमार चौरसिया धीमरखेडा कटनी


