उमरियापान | कहते हैं कि लोकतंत्र की नींव गांवों से मजबूत होती है और पंचायत व्यवस्था इसी नींव को मजबूत करने का सबसे बड़ा आधार है। मगर जब गांव की सरकार ही जनता की आकांक्षाओं और उम्मीदों के साथ छल करने लगे, तो सवाल उठना लाजमी है। हाल ही में ग्राम पंचायत उमरियापान में हो रहे फर्सीकरण कार्य को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों और स्थानीय जानकारों का कहना है कि विधायक निधि से प्राप्त राशि का खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है और प्रशासनिक अधिकारी शिकायत सुनने तक को तैयार नहीं हैं।
*विधायक निधि की राशि और कार्य का उद्देश्य*
गौरतलब है कि ग्राम पंचायत उमरियापान में स्थानीय विधायक द्वारा पांच लाख रुपये की विधायक निधि से फर्सीकरण कार्य स्वीकृत किया गया था। इस निधि का उद्देश्य था कि बाजार क्षेत्र में सुविधाजनक फर्श बनाकर ग्रामीणों और राहगीरों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराई जाए। ऐसे कार्यों का मकसद आम जनता को राहत और टिकाऊ विकास देना होता है, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है।
*सरपंच पुत्र के हाथों में पंचायत की कमान*
ग्राम पंचायत की कमान भले ही कागज़ों में चुनी हुई सरपंच के हाथों में हो, लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि संपूर्ण निर्णय और ठेकेदारी का जिम्मा सरपंच के पुत्र संभाल रहे हैं। बताया जा रहा है कि कार्य किससे कराया जाए, किसे भुगतान दिया जाए और किस स्तर की सामग्री खरीदी जाए—इन सब पर सरपंच पुत्र का ही एकाधिकार है। यह स्थिति न केवल पंचायत राज अधिनियम की भावना के खिलाफ है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था का मज़ाक भी उड़ाती है।
*ठेकेदार से कराए जा रहे काम*
सूत्रों के मुताबिक, पंचायत के स्थानीय मजदूरों या ग्राम सभा की सहमति से काम कराने की बजाय, सरपंच पुत्र ने अपने नजदीकी ठेकेदार को जिम्मेदारी सौंप दी है। नियमों के अनुसार पंचायत स्तर पर होने वाले कार्यों में स्थानीय लोगों की भागीदारी और पारदर्शिता जरूरी होती है। लेकिन यहां देखा जा रहा है कि ठेकेदार से मनमाने ढंग से काम कराया जा रहा है, जिसमें न तो गुणवत्ता का ध्यान रखा जा रहा है और न ही पारदर्शिता का।
*घटिया सामग्री और मनमानी मापदंड*
फर्सीकरण कार्य में उपयोग हो रही सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जो सीमेंट, बालू और पत्थर लगाए जा रहे हैं, उनकी गुणवत्ता बेहद निम्न स्तर की है। कहीं फर्सी पतली डाली जा रही है तो कहीं लेवलिंग तक सही नहीं है। नतीजा यह होगा कि चंद महीनों में ही यह कार्य टूट-फूट का शिकार हो जाएगा। जनता के टैक्स से दी गई निधि का ऐसा दुरुपयोग विकास की जगह बर्बादी की मिसाल बनेगा।
*इनका कहना है*
अगर इस तरह का घटिया निर्माण कार्य कराया जा रहा हैं तो गलत हैं इसकी जांच कराई जाएंगी
*जनपद सीईओ यजुर्वेंद्र कोरी*
नोट रेट सीमेंट लगाना नियम विरुद्ध हैं अगर इस तरह का कार्य कराया जा रहा हैं तो जांच कराकर कार्यवाही की जाएंगी
*अजय केशरवानी एसडीओ*
मुझे इस विषय की कोई जानकारी नहीं हैं
*इंजीनियर प्रदीप यादव*
मुझे नोट रेट सीमेंट की कोई जानकारी नहीं है
*राजकुमार पटैल सचिव*
रिपोर्टर राजेंद्र कुमार चौरसिया धीमरखेडा कटनी


