विगत् दिनों छिंदवाड़ा जिले में मासूम बच्चों की ईलाज के दौरान मौत होने के विषय में समाचार पत्रों में प्रकाशित लेखों से प्रथम दृष्टया पता चलता है कि उनकी विषाक्त कफ सिरप के सेवन से किडनी फेल होने से मौत हुई है। कप सिरप तमिलनाडु की फर्म के द्वारा बनाया गया था। देश में दवाईयों का बनना एवं वितरण के लिये माकूल एक विभाग होता है, जो बनने से लेकर वितरण तक निगरानी करता है अर्थात् ड्रग कंट्रोलर (औषधीय नियंत्रक) विभाग ने अपना काम ठीक से नहीं किया, इससे जिले के दर्जनों मासूम बच्चों को अपनी जान गंवानी पड़ी यदि किसी कंपनी ने लापरवाही करके कोई अमानक या विषाक्त दवाई बनाई थी तो उसे वहीं जांच कर रोका जा सकता था, परंतु ऐसा न होकर कफ सिरप तमिलनाडु से होकर छिंदवाड़ा, परासिया पहुँच गयी, लेकिन इस कप सिरफ की कहीं कोई जांच नहीं हुई । पूरा औषधीय नियंत्रक विभाग इन मासूमों की मौत होने तक पंगु बना रहा इसके लिये औषधीय नियंत्रक विभाग के अधिकारी के साथ-साथ केन्द्र एवं राज्य सरकार और केन्द्र एवं प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जिम्मेदार हैं।
प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी परासिया में आकर पीड़ित बच्चों के परिजनों को मात्र आश्वासन देकर अपना पल्ला झाड़ लिया, जबकि उन्हें तत्काल दोषियों के सख्त कार्रवाई करते हुए सजा दिलानी चाहिए बच्चों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए।
*संवाददाता शुभम सहारे छिंदवाड़ा*


