डॉ इंदु भूषण बाली
वर्णननीय है कि मोहयाल सभा जम्मू का गठन हमारे पूर्वजों द्वारा 1891 में किया गया था। उन्हें शत शत नमन करते हुए बताना चाहता हूॅं कि उन्होंने उक्त सभा का गठन मानवता, भाईचारा और एक दूसरे की सहायता हेतु किया था जिसमें हमारी सात विशेष जातियां हैं। उनका वर्गीकरण बाली, भीमवाल, छिब्बर, दत्त, लौ, मोहन, और वैद के रूप में किया गया है जो ब्राह्मण योद्धाओं के नाम से विश्व प्रसिद्ध हैं।
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लेकिन वर्तमान स्थिति इस प्रकार गम्भीर बन गई है कि मुझे “मोहयाल सभा जम्मू और उसके अनसाउंड माइंड पदाधिकारी” जैसे अशोभनीय शीर्षक से आलेख लिखना पड़ रहा है जिसके अनेकों ज्वलंत आधारपूर्ण कारण हैं। इसलिए मुझे लिखते हुए असहनीय पीड़ा और दुख भी हो रहा है लेकिन लिखने के लिए बाध्य इसलिए हुआ हूॅं कि हमारे पूर्वजों ने कभी स्वप्न में भी कल्पना नहीं की होगी कि उनके उत्तराधिकारी उल्टी गंगा भी बहाएंगे और सहायता करने के समय में पीड़ितों के पास कटोरा लेकर चले जाएंगे?
उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों भारत-पाक युद्धक स्थिति का जम्मू-पुन्छ के सम्पूर्ण नागरिकों को सहन करना पड़ा था। दोनों ओर से तोपें, ड्रोन और मिज़ाइलें चली थीं जिनकी लपेट में पुन्छ क्षेत्र अत्यधिक क्षतिग्रस्त हुआ था। इसके अतिरिक्त भारी बारिश हुई थी और घर क्षतिग्रस्त हो गए, घरों में पानी घुस गया, जीवन तहस नहस हो गया, बादल फटे, बादल फटने के कारण माता वैष्णो देवी तथा मचैल यात्रा में त्रासदी भी हुई और चारों ओर त्राहिमाम त्राहिमाम हो गया था। यही नहीं बल्कि असंख्य श्रद्धालुओं के प्राण पुखेरू भी उड़ गए और कुछेक अभी भी लापता हैं।
उपरोक्त गम्भीर मार्मिक परस्थितियों में भी पंजिकृत “जम्मू कश्मीर मोहयाल सभा जम्मू” पीड़ितों की सहायता के करने के स्थान पर कभी वार्षिक सामान्य बैठक (AGM) और कभी मेला आयोजित करने के लिए जम्मू से लेकर सीमावर्ती पुन्छ क्षेत्र के मोहयालों से लक्की ड्रा के नाम पर लाखों रुपए की अवैध मांग कर रहे हैं। हालांकि सच यह है कि उक्त मेले पर कई सम्पन्न मोहयाल परिवार अकेले ही सम्पूर्ण खर्च करने में सक्षम हैं। लेकिन उन्हें नकारात्मक व्यक्तित्व कहते हुए आमन्त्रित तक नहीं किया जाता है। उल्लेखनीय है कि पदाधिकारियों का ऐसा व्यवहार, घृणित मॉंग और लाटरी (विनिमय) अधिनियम 1998 के अन्तर्गत जुए का विरोध करते हुए “मोहयाल सभा पुन्छ” के पूजनीय अध्यक्ष श्री विपन बाली जी ने अपने अन्य सहयोगी पदाधिकारियों ने प्राप्त तीन कापियां अर्थात तीन सौ रसीदों को लौटा दिया था। रसीदों को लौटाने से पूर्व उन्होंने गुरुनिवास पुन्छ में पूजनीय गुरुश्री “भाई लोकेश कुमार दत्ता जी” के आशीर्वाद से बिरादरी की उपस्थिति में पूजनीय अरूण छिब्बर जी को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से, पूजनीय मदन मोहन बक्शी जी और जम्मू कश्मीर मोहयाल सभा के पूज्यनीय अध्यक्ष श्री अनिल दीप मेहता जी को दूरभाष के माध्यम से समस्त पदाधिकारियों से आग्रह किया था कि यह समय मेला आयोजित करने एवं उसके लिए धन एकत्रित करने का नहीं बल्कि पीड़ितों की सहायता करने का है। इसलिए प्रार्थना है कि कृपया दो माह के लिए आयोजित मेले की तिधि को स्थगित कर दिया जाए।
इतनी विनम्रता से की गई जनहित प्रार्थना को स्वीकार करने के स्थान पर उपरोक्त विद्वान पूजनीयों ने क्रूरतापूर्ण व्यवहार से ठुकरा दिया गया था। हालांकि साधारण बुद्धि के व्यक्ति को भी समझ आ रही है कि शवों पर मेला आयोजित करना पाप ही नहीं बल्कि महापाप है। इसके अतिरिक्त सोसायटी पंजिकरण अधिनियम 1860 का जानबूझकर उल्लॅंघन है। उससे भी बढ़कर मेले के लिए धन एकत्रित करने हेतु 250 रुपए की रसीद के माध्यम से लक्की ड्रा अर्थात जुआ खेलना भी सरस्वती मंदिर का अपमान है। यदि बात लॉटरी (विनिमय) अधिनियम 1998 की करें तो सरकार से बिना अनुमति लिए उक्त लक्की ड्रा बिना जमानत गिरफ्तारी वाला गम्भीर अपराध है।
विडम्बना यह है कि मैं उक्त पंजिकृत सभा का जीवन सदस्य हूॅं और मेरे पूछने पर भी यह नहीं बताया जा रहा है कि सभा के पदाधिकारियों ने रजिस्ट्रार सोसायटी जम्मू अथवा डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट जम्मू से अनुमति ली भी है या नहीं। वर्णननीय है कि उक्त जानकारियों की मांग करने पर सभा के कतिपय पदाधिकारियों ने असंसदीय ही नहीं बल्कि आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते हुए जान से मारने अर्थात हत्या करने की धमकी दे रहे हैं जो गुंडागर्दी, अशोभनीय एवं निंदनीय तो है ही उस पर दण्डनीय अपराध भी है।
विचारणीय यह भी है कि मेले सम्बन्धित कार्यों को गोपनीय रखा जा रहा है। क्योंकि एजीएम में मेले का अनुमानित खर्चा साढ़े सात लाख रुपए का बताया गया था जिसकी रूपरेखा वरिष्ठ सदस्यों द्वारा पूछने पर भी सार्वजनिक नहीं की जा रही है। सदस्यों का यह भी प्रश्न है कि क्या बाहर से आमन्त्रित मोहयाल मेहमानों का मंहगे होटलों में ठहराने का राजसी खर्चा भी ग़रीब और मध्यवर्गीय मोहयाल परिवारों से एकत्रित किए गए धन से किया जाएगा या वह मेहमान अपना खर्चा स्वयं सहन करेंगे? इसके अतिरिक्त सम्मानित होने वाले कर्तव्यनिष्ठ महानुभावों की चयन प्रकिया क्या होगी अर्थात क्राइटेरिया क्या होगा? क्या उनके सम्मान का बोझ भी सभा ही करेगी? प्रश्न तो यह भी है कि चयनित पदाधिकारियों का आर्थिक सहयोग कितना-कितना है?
अंत में मैं अन्तिम प्रार्थना करना चाहता हूॅं कि उपरोक्त प्रश्नों के उत्तरों सहित आपराधिक षड़यन्त्र द्वारा संचालित लक्की ड्रा को बन्द किया जाए। अन्यथा प्रशासनिक ही नहीं बल्कि न्यायिक कार्यवाही भी की जाएगी। उल्लेखनीय है कि सभा के पूजनीय पदाधिकारी समय रहते हुए उचित न्यायिक सुधार करें। अन्यथा सोसायटी पंजिकरण अधिनियम 1860, लॉटरी (विनिमय) अधिनियम 1998 के आपराधिक उल्लंघन को रोकने हेतु प्रार्थी संविधान के अनुच्छेद 226 के अन्तर्गत माननीय जम्मू और कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय जम्मू में और अनुच्छेद 32 के अन्तर्गत माननीय उच्चतम न्यायालय दिल्ली में जनहित याचिका दायर करने के लिए विवश ही नहीं बल्कि बाध्य हो जाएंगे। सम्माननीयों जय हिन्द
प्रार्थी
डॉ. इंदु भूषण बाली
प्रेस कोर कॉउन्सिल का
राष्ट्रभक्त राष्ट्रीय सॅंरक्षक,
राष्ट्रपति पद का पूर्व प्रत्याशी, वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार, डाकघर एवं तहसील ज्यौड़ियॉं, जिला (जम्मू) जम्मू और कश्मीर पिनकोड 181202
मोबाइल 7889843859
ईमेल आईडी baliindubhushan@gmail.com
प्रतिलिपि सेवा में :-
1) रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटी जम्मू कश्मीर जम्मू, त्वरित कार्रवाई एवं सूचनार्थ।
2) डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट जम्मू, त्वरित कार्रवाई एवं सूचनार्थ।
3) सेंट्रल मोहयाल सभा दिल्ली के पूजनीय अध्यक्ष श्री सुनील वैद जी को त्वरित कार्रवाई एवं सूचनार्थ।
4) जनरल मोहयाल सभा दिल्ली के पूजनीय अध्यक्ष श्री विनोद दत्त जी को त्वरित कार्रवाई एवं सूचनार्थ।
5) माननीय महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी को सादर त्वरित कार्रवाई एवं सूचनार्थ।
6) जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के गृहसचिव को त्वरित कार्रवाई एवं सूचनार्थ।
7) माननीय जम्मू और कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के माननीय विद्वान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री अरूण पल्ली जी को त्वरित कार्रवाई एवं सूचनार्थ।
8) माननीय उच्चतम न्यायालय दिल्ली के माननीय विद्वान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री बी आर गवई जी को त्वरित कार्रवाई एवं सूचनार्थ।


